बंगाल: 'आंखों पर बांधी पट्टी, फिर मंदारमणि ले जाकर दी धमकी'; नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी पर सियासी घमासान
नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर बंगाल में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने ...और पढ़ें

कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर बंगाल में सियासी घमासान
HighLights
कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की नंदीग्राम उपचुनाव से पहले गिरफ्तारी।
कांग्रेस का आरोप- आंखों पर पट्टी बांधकर उम्मीदवारी वापस लेने का दबाव।
पुलिस का दावा- मिलन प्रधान के खिलाफ लंबित थे चार गैर-जमानती वारंट।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि 18 सितंबर को चंडीपुर के एक गेस्ट हाउस से गिरफ्तारी के बाद मिलन प्रधान और पार्टी पर्यवेक्षक शुभाशीष भट्टाचार्य को आंखों पर पट्टी बांधकर मंदारमणि ले जाया गया और वहां उम्मीदवारी वापस लेने का दबाव बनाया गया।
हालांकि, राज्य पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मिलन के खिलाफ लंबे समय से चार गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट लंबित थे और कानून के तहत ही उनकी गिरफ्तारी की गई।
कांग्रेस का आरोप है कि उपचुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से मिलन प्रधान पर चुनाव से हटने का दबाव बनाया जा रहा था। पार्टी के अनुसार, पुराने मामलों का हवाला देकर उन्हें चुनाव मैदान से हटाने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने नामांकन वापस लेने से इन्कार कर दिया।
18 सितंबर को चंडीपुर के गेस्ट हाउस से पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। कांग्रेस का दावा है कि पुलिस उन्हें सीढ़ियों से जबरन नीचे लेकर गई। वहां मौजूद पार्टी पर्यवेक्षक शुभाशीष भट्टाचार्य ने विरोध किया तो उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया।
फरारी और चार वारंट का दिया हवाला
राज्य पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के अनुसार, मिलन प्रधान के खिलाफ अदालत से जारी चार गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट लंबित थे।
2007 में नंदीग्राम और खेजुरी थानों में दर्ज मामलों में उन पर हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, हथियार के साथ दंगा, साक्ष्य मिटाने और दूसरे की जमीन पर अनधिकृत प्रवेश जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है।
पुलिस का कहना है कि मिलन 2007 से करीब 19 वर्षों से फरार थे और चार्जशीट में भी उन्हें फरार आरोपित बताया गया था। वारंट की तामील नहीं होने पर पुलिस ने अदालत में कई बार नान-एक्जीक्यूशन रिपोर्ट भी दाखिल की थी।
पुलिस के अनुसार, चुनाव से पहले लंबित वारंटों की तामील चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत इलाके में लौटने की सूचना मिलने पर मिलन को गिरफ्तार किया गया। मिलन को शनिवार सुबह अदालत में पेश किया गया।
