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    बंगाल में SIR गणना फॉर्म भरने में मुस्लिम बहुल क्षेत्र आगे, सीमावर्ती इलाकों से बड़ी संख्या में लोग आ रहे आगे

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 08:02 PM (IST)

    पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर गहमागहमी है। मुस्लिम बहुल इलाकों में नाम जुड़वाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में उदासीनता है। जंगीपुर में गणना फार्म भरने में तेजी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसआईआर को लेकर संदेश देने वाली हैं। भाजपा का दावा है कि एसआईआर से सरकार मुश्किल में आएगी, जबकि तृणमूल इसे नकार रही है।

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    बंगाल में SIR गणना फॉर्म भरने में मुस्लिम बहुल क्षेत्र आगे (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो,जागरण, कोलकाता। शुरुआती गणना में किन लोगों के नाम हटे और किनके नाम शामिल किए गए, यह ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद सामने आएगा। हालांकि, अब तक जो रूझान सामने आ रहे हैं, वह यह है कि राज्य के अलग-अलग मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए विशेष कोशिशें की जा रही हैं। दावे और जमीनी जानकारी के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है।

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    भाजपा नेता पहले ही कह रहे हैं कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआइआर) में एक करोड़ से अधिक नाम हटेंगे। सीमा पार से बंगाल में आए घुसपैठियों को भागना पड़ेगा। हालांकि यह अभी भी साफ नहीं है कि आखिर में कितने नाम मतदाता सूची से हटेंगे, लेकिन एसआइआर के लिए गणना फार्म भरने के बाद अलग-अलग मुस्लिम बहुल इलाकों से बड़ी संख्या में लोग फार्म जमा दे रहे हैं।

    चुनाव आयोग से मिली जानकारी और तृणमूल कांग्रेस और माकपा की अंदर की खबरें इस बात पर सहमत हैं। मुस्लिम इलाकों में बूथ लेवल आफिसर (बीएलओ) के साथ मिलकर स्थानीय लोग गणना फार्म भर रहे हैं। दूसरी तरफ, बनगांव के सीमावर्ती इलाके में गणना फार्म भरने की दर काफी कम है।

    वहां मतुआ समेत नामशूद्र रहते हैं और हाल के दिनों में वे भाजपा का वोट बैंक बन गए हैं। भले ही बाहर से एसआइआर के विरोध में तीखे सुर हों, लेकिन सत्ताधारी खेमे में अभी तक कम से कम घबराहट की कोई बात नहीं है।

    मुर्शिबादा के जंगीपुर जैसे लोकसभा क्षेत्र गणना फार्म भरने में दिख रहा है आगे

    बीएलओ के जरिए आयोग को दी गई जानकारी और तृणमूल के सांगठनिक स्तर पर सामने आ रही जानकारी की तुलना करें तो पता चलता है कि गणना फार्म भरने के मामले में जंगीपुर लोकसभा सीट अभी भी सबसे आगे है। जंगीपुर जहां नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) और वक्फ संशोधन एक्ट के विरोध में हिंसा भड़की थी, वहां एसआइआर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    खास बात यह है कि मुर्शिदाबाद जिले में ही तृणमूल ने आरोप लगाया है कि एसआइआर से 'घबराहट' की वजह से छह वोटरों की मौत हो गई है। लेकिन उस जिले में मुस्लिम बहुल इलाके के बाद उसके विधानसभा क्षेत्रों में गणना फार्म भरने का काम बढ़ गया है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दो मुस्लिम बहुल जिलों मालदा और मुर्शिदाबाद में एसआइआर को लेकर संदेश देने वाली हैं।

    अगर सब कुछ ठीक रहा तो तृणमूल नेता तीन दिसंबर को मालदा में और चार दिसंबर (मतगणना पर्चियां दाखिल करने के आखिरी दिन) को बहरमपुर में सभाएं करने वाली हैं। अब तक बशीरहाट, कूचबिहार, रायगंज (उत्तर दिनाजपुर) लोकसभा क्षेत्रों में 90 प्रतिशत से अधिक गणना फार्म भरे जा चुके हैं। इनमें से प्रत्येक में सीमावर्ती क्षेत्र और मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी-खासी संख्या है। मालदा में 88 प्रतिशत से अधिक दाखिल की जा चुकी है। गैर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बांकुड़ा और पूर्व बर्द्धमान में 90 प्रतिशत को पार कर चुका है।

    मतुआ के गढ़ में गणना फार्म भरने में दिख रही है उदासीनता

    दूसरी ओर, मतुआ-गढ़ के नाम से मशहूर बनगांव में यह दर 45 प्रतिशत है। नदिया जिले के राणाघाट में भी मतुआ समुदाय मौजूद है। हालांकि, वहां गणना फार्म भरने की दर तुलनात्मक रूप से अधिक, 70 प्रतिशत से ज्यादा है। बर्द्धमान-दुर्गापुर और आसनसोल लोकसभा क्षेत्रों के पश्चिम बर्द्धमान के हिस्से को मिलाकर 45.5 प्रतिशत और कोलकाता दक्षिण को 47 प्रतिशत फार्म जमा हुए हैं।

    कोलकाता उत्तर में यह दर अभी भी 32 प्रतिशत ही है। चुनाव आयोग के अनुसार, राज्य के 7.66 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 88प्रतिशत ने शुक्रवार तक अपना गणना फार्म प्राप्त और डिजिटाइज़ कर लिए हैं। एसआइआर ममता सरकार को मुश्किल में डाल देगा भाजपा का यह दावा तृणमूल नेताओं के अनुसार हकीकत में पूरा नहीं हो रहा है। आयोग ने पर्याप्त समय नहीं दिया है, डेटा अपलोड करने में कई तरह की समस्याएं हैं। इन सबके बीच, गणना प्रपत्र भरने की प्रगति अच्छी है, खासकर मुस्लिम क्षेत्रों में।

    माकपा सेंट्रल कमेटी के एक नेता के मुताबिक मरे हुए और नकली वोटरों को पक्का बाहर किया जाना चाहिए। अगर आयोग हर साल वोटर लिस्ट को ठीक से संशोधित करने का काम करे, तो एसआइआर की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि,भाजपा अपने तेवर पर कायम है। विपक्ष के नेता सुवेदु अधिकारी का दावा है कि घुसपैठिये तृणमूल का वोट बैंक हैं। सत्तारूढ़ पार्टी उन्हें बचाने की हर कोशिश कर रही है। यहां तक कि, राज्य प्रशासन के बड़े अधिकारियों के जरिए, जिलों और विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव अधिकारियों पर दबाव डाला जा रहा है कि वे कोई नाम न छोड़ें।