नई दिल्ली, प्रेट्र। तृणमूल कांग्रेस (तृकां) से छह वर्षो के लिए निलंबित मुकुल रॉय अपनी नई पार्टी बना सकते हैं। इसके बाद उनका लक्ष्य पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव होंगे ताकि वह अपनी राजनीतिक ताकत आजमा सकें।

रॉय ने पिछले दिनों कहा था कि वह भाजपा को सांप्रदायिक ताकत नहीं मानते। अगर यह सांप्रदायिक पार्टी होती तो चुनाव आयोग उसे मान्यता नहीं देता। उन्होंने यह भी कहा था कि तृकां को सफलता नहीं मिलती अगर शुरुआती दौर में उसे भाजपा का समर्थन नहीं मिलता। मुकुल रॉय के इन बयानों के बाद उनके भाजपा में जाने के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन, भाजपा सूत्रों को लगता है कि वह अपनी पार्टी बनाएंगे।

रॉय ने भी पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'पंचायत चुनावों के पहले चरण की हर सीट के लिए मेरे पास प्रत्याशी हैं। लेकिन, राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद ही मैं अपनी भविष्य की योजना तैयार करूंगा।' उन्होंने व्यक्ति रूप से इस्तीफा सौंपने के लिए राज्यसभा के सभापति से समय भी मांगा है।

एक समय तृकां में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद दूसरे स्थान पर रहे मुकुल रॉय ने दावा किया कि वह तृकां के कई असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क में हैं। शुक्रवार को दिल्ली में उन्होंने पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी और माकपा के निष्कासित नेता ऋतृब्रत बनर्जी से भी मुलाकात की थी। खास बात यह है कि अधीर रंजन और ऋतृब्रत दोनों ही इन दिनों भाजपा से नजदीकियों की वजह से खबरों में हैं।

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Posted By: Sachin Mishra

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