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 हुगली, जागरण संवाददाता। तब मैंने यूं ही बेटा का नाम चंद्रकांत रखा था, सपने में भी नहीं सोचा था कि उसका जीवन एक दिन चांद से इस कदर जुड़ जाएगा। आज भी याद है मुझे, कभी मामूली से जूते के लिए उसे तरसना पड़ा था। यह कहते हुए उस मां की आंखें भर आईं, जिसका बेटा आज अंतरिक्ष वैज्ञानिक है। असीमा रानी कुमार चंद्रकांत कुमार की मां हैं। चंद्रकांत, भारत के चंद्रयान-2 मिशन के डिप्टी डायरेक्टर हैं।

चंद्रकांत का इस अभियान में बेहद अहम भूमिका है। पूरे भारत के साथ ही चंद्रकांत की मां के लिए यह दिन बेहद खास है। चंद्रयान-2 के इस अभियान की सफलता के लिए बाकी देशवासियों के साथ ही चंद्रकांत की मां भी दुआएं कर रही थी। सुबह उठते ही वह मंदिर गईं और चंद्रयान की सफलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना की थी।

बता दें कि चंद्रकांत के बनाए एंटीना चंद्रयान-2 में लगा है, जिससे यान की पल-पल की जानकारी इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (इसरो) के वैज्ञानिकों को लगातार मिल रही है। चंद्रयान-2 (शुक्रवार) रात 1.40 से 1.55 बजे के बीच चंद्रमा पर उतरनेे की संभावना थी। इस उपलब्धि के साथ ही भारत विश्व के उन देशों की श्रेणी में शामिल हो गाया, जिन्हें चांद पर यान भेजने में कामयाबी मिली है।

इतना ही नहीं अंतरिक्ष में यह उपलब्धि देश को अब तक मिली अंतरिक्ष कामयाबी में सबसे बड़ी है। चांद की उड़ान भरने वाला चंद्रकांत को कभी रोटी भी नसीब नहीं होती थी, यह कहते हुए मां की आंखे आंसूओं से भर जाती है।

बता दें कि चंद्रकांत कुमार हुगली के गुड़ाप में रहते हैं। वह बेहद गरीबी में पले हैं। कड़ी मेहनत व लगन के बूते उन्होंने अपने जीवन को एक दिशा दी। चंद्रकांत की इस उपलब्धि पर पूरा जिला गर्व महसूस कर रहा है।

 

Posted By: Preeti jha

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