कोलकाता, जागरण संवाददाता। इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आइआइटी) खड़गपुर शहर पर आधारित ऐसे मानचित्र तैयार कर रहा है, जिनकी बदौलत उक्त शहर के उन इलाकों का पता लगाया जा सकेगा, जहां भूकंप आने पर सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचने की आशंका है। इससे वहां की सरकार प्राकृतिक आपदा की सूरत में जल्द से जल्द राहत व बचाव कार्य शुरू कर सकेगी।

आइआइटी खड़गपुर के वैज्ञानिक शंकर कुमार नाथ ने बताया कि आपदा के दौरान समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। उस वक्त समय ही जीवन होता है। शंकर कुमार नाथ आइआइटी रुड़की में अर्थक्वेक इंजीनियरिंग पर हुई 16वीं संगोष्ठी में इससे संबंधित अपनी अनुसंधान रिपोर्ट पेश कर चुके हैं, जिसपर वे पिछले 25 वर्षों से काम करते आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शहर पर आधारित मानचित्र से इस बात का भी आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि भूकंप के कारण कौन-कौन से रास्ते अवरुद्ध हो सकते हैं और किस तरह की राहत सामग्रियों की जरुरत पड़ सकती है। इससे इस चीज का भी आकलन किया जा सकेगा कि भूकंप के बाद राहत व पुनर्वास कार्यों के लिए कितने फंड की जरुरत पड़ेगी।

शंकर कुमार नाथ ने बतौर उदाहरण कहा कि कोलकाता में भूकंप आने पर 231 मिलियन तक का नुकसान हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि हिमालयी क्षेत्र में कम से कम 10 लाख लोगों के भूकंप से बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। 

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