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खराब स्वास्थ्य और सुरक्षा दबाव के बीच माओवादी नेता आकाश ने जंगल छोड़ा

Published: Mon, 14 Sep 2026 09:19 PM (IST)

सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेता आकाश उर्फ असीम मंडल ने खराब स्वास्थ्य और बढ़ते सुरक्षा दबाव के कारण अपने सैन्य दस्ते को भंग कर जंगल छोड़ दिया है।

माओवादी नेता आकाश उर्फ असीम मंडल ने जंगल छोड़ा (सांकेतिक तस्वीर)

माओवादी नेता आकाश उर्फ असीम मंडल ने जंगल छोड़ा (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. माओवादी नेता आकाश उर्फ असीम मंडल ने जंगल छोड़ा

  2. खराब स्वास्थ्य और सुरक्षा दबाव प्रमुख कारण रहे

  3. एक करोड़ के इनामी आकाश 2011 से नेतृत्व कर रहे थे

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। सीपीआई (माओवादी) के पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के सैन्य दस्ते को भंग कर 64 वर्षीय शीर्ष नेता आकाश उर्फ असीम मंडल ने जंगल छोड़ दिया है।

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, खराब स्वास्थ्य और लगातार बढ़ते सुरक्षा दबाव के कारण उसने यह कदम उठाया। पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोना निवासी आकाश पर एक करोड़ रुपये का इनाम है और वह 2011 से राज्य में माओवादी संगठन का नेतृत्व कर रहा था।

माओवादी नेता आकाश ने जंगल छोड़ा

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय में दस्ते के सदस्यों की गिरफ्तारी, मुठभेड़ में मौत और आत्मसमर्पण से संगठन को लगातार झटका लगा है। आकाश ने अगस्त के मध्य में दलमा रेंज के जंगल से सामान्य कपड़ों में निकलने से पहले अपने साथियों को सुरक्षित रहने की सलाह दी।

इसके बाद उसने दस्ते को भंग करने का फैसला किया। आकाश के करीबी माने जाने वाले शचिन, मिता और जवा के पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने के बाद सुरक्षा एजेंसियों को संगठन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। हालांकि झारखंड-बंगाल सीमा पर दो माओवादी सदस्यों के अब भी हथियारों के साथ छिपे होने की जानकारी है।

40 साल से माओवादी आंदोलन से जुड़ा

आकाश 1980 के दशक में कॉलेज के दिनों से वाम उग्रवादी आंदोलन से जुड़ा था। सीपीआइ (माओवादी) के गठन के बाद वह लंबे समय तक जंगल में रहकर संगठन का काम करता रहा। 2011 में किशनजी की मौत के बाद उसे बंगाल का चौथा राज्य सचिव बनाया गया था।

2018 तक उसने झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में संगठन को सक्रिय रखा। बाद में पश्चिम सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र में ठिकाना बनाया और हाल में फिर बंगाल-झारखंड सीमा क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने की कोशिश की थी।

खुफिया अधिकारियों के अनुसार, अब वह जंगल से बाहर शहर में रहकर संगठन के लिए नई रणनीति बनाने की कोशिश कर सकता है। उसकी तलाश और गतिविधियों पर बंगाल तथा झारखंड पुलिस की नजर बनी हुई है।