जागरण संवाददाता, कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तर बंगाल में हजारों मछुआरों और किसानों की आजीविका के स्त्रोत आत्रेयी नदी के घटते जलस्तर को लेकर बांग्लादेश द्वारा किए जा रहे बांध निर्माण को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि केंद्र इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहा है। नदी के संबंध में विपक्ष की ओर से विधानसभा के मौजूदा मानसून सत्र में उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए ममता ने कहा कि नई दिल्ली (केंद्र सरकार) ढाका (बांग्लादेश सरकार) के सामने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं उठा रहा है। बांग्लादेश द्वारा बांध बनाए जाने के कारण दक्षिण दिनाजपुर जिले के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बाग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से बातचीत की है। इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से विभिन्न सूचनाएं भी केंद्र को भेजी गई हैं लेकिन केंद्र इस मामले को हल्के में ले रहा है।

गौरतलब है कि आत्रेयी नदी का विवरण महाभारत में भी है। बंगाल में दक्षिण दिनाजपुर जिले से होकर नदी सिलीगुड़ी होते हुए बाग्लादेश में प्रवेश करती है। लगभग 400 किमी लंबी नदी हजारों मछुआरों और किसानों की आजीविका का स्त्रोत है। नदी का जल सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जाता हैं। हाल के वषरें में बाग्लादेश में बराज बनाने से इसका प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ साल पहले बाग्लादेश द्वारा एक बांध का निर्माण करने के बाद से नदी गर्मियों में सूखी रहती है।

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राज्य को बाढ़ में डुबाने की रची जा रही साजिश

दूसरी ओर ममता बनर्जी ने राज्य में हर साल कुछ जिलों में बाढ़ की स्थिति को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि राज्य को बाढ़ में डुबाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि बंगाल हर वर्ष बाढ़ में डूब जाता है। दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) का नवीकरण नहीं किया जा रहा है। फरक्का में ड्रेजिंग भी नहीं होती है। बाढ़ आने पर झारखंड भी अपने हिस्से का पानी बंगाल की ओर छोड़ देता है। केवल फरक्का बांध ही नहीं, डीवीसी के नवीकरण या मरम्मत के लिए भी लंबे समय से राज्य सरकार आवेदन करती रही है लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया।

Posted By: Jagran

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