कोलकाता, जागरण संवाददाता। कभी-कभी सुना जाता है कि नागालैंड में बंगालियों को प्रताडि़त किया जाता है। असम में भी बिहारियों को प्रताडि़त करने की घटना हुई है, लेकिन पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य है जहां इस तरह की घटनाएं कभी नहीं हुई और ना ही कभी होंगी। यह गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को ये बातें कहीं।

वे नेताजी इंडोर स्टेडियम में राष्ट्रीय बिहारी समाज की ओर से आयोजित हिंदी उत्सव को संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि असम में एनआरसी के तहत 40 लाख लोगों के नाम काट दिए गए हैं। उन लोगों में बिहारी, बंगाली सहित अन्य राज्यों के लोग भी शामिल हैं। बंगाल में ऐसा नहीं होगा। पश्चिम बंगाल हिंदुस्तान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां हर जाति, धर्म, भाषा एवं क्षेत्र के लोग रहते हैं। यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, असम, तमिलनाडु इत्यादि राज्यों के लोग बसे हुए हैं।

यह धरती वेद, कुरान, पुराण, त्रिपिटक सभी की है। त्याग का नाम ही हिंदी है। सभी से मेरे अच्छे रिश्ते हैं। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद से भी हमारे अच्छे संबंध हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम देश को बंटने नहीं देंगे। कुछ लोग चुनाव के वक्त बिहारी के नाम पर वोट मांगने आते हैं, लेकिन मैं ऐसा नहीं करतीं। हमें बिहारी खुद वोट देते हैं। जिनके दिल में काला होता है, वे ही चुनाव के समय जाति, भाषा के नाम पर वोट मांगते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल में सबसे अधिक हिंदीभाषी बसे हुए हैं। कोलकाता नगर निगम में काम करने वाले 90 फीसद हिंदीभाषी हैं। 100 दिन रोजगार योजना के तहत काम करने वाले लोगों में भी हिंदीभाषी ही सर्वाधिक हैं। हिंदी के लिए काफी कुछ किया जा रहा है। सीएम ने बंगाल में हिंदी विश्र्वविद्यालय खोलने का भी मंच से आश्र्वासन दिया। इसके पहले राष्ट्रीय बिहारी समाज ने इसके लिए मुख्यमंत्री से आवेदन किया था। 

Posted By: Preeti jha