कोलकाता, जागरण संवाददाता। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट की तर्ज पर कॉलेजियम के गठन की मांग की है। उन्होंने चुनाव आयोग पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग के तीन नामित सदस्यों पर चुनाव कराने की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए।

ममता ने ईवीएम में गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों से एकजुट होकर तथ्यों का पता लगाने वाली कमेटी गठित करने की मांग की। उन्होंने कहा-'ईवीएम को प्रोग्राम किए जाने के ढेरों प्रमाण मिले हैं। इस बाबत तथ्यों का पता लगाने वाली कमेटी गठित की जानी चाहिए। मैं इस बारे में कांग्रेस से भी बातचीत करूंगी। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए जिस तरह से कॉलेजियम होता है, उसी तरह चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए भी कॉलेजियम होना चाहिए। तीन नामित सदस्यों पर चुनाव कराने की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए।

मोदी सरकार की ओर से बुलाई गई नीति आयोग की बैठक में भाग नहीं लेने के फैसले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें शामिल होने का कोई मतलब नहीं है। बैठक का एजेंडा केंद्र सरकार की ओर से राज्य सरकारों से सलाह-मशविरा किए बिना ही तय कर दिया जाता है, जो राज्यों से संबंधित मामलों के लिहाज से गैर-महत्वपूर्ण होते हैं। राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों को बैठक में बोलने भी नहीं दिया जाता है इसलिए उन्होंने बैठक में शरीक नहीं होने का फैसला किया।

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Posted By: Preeti jha

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