कोलकाता, जागरण संवाददाता। विविधता में एकता भारत का मुख्य आधार है। पुस्तकें हिंदी में लिखी हों या उर्दू में, हम दोनों को स्वीकार करेंगे। भगवद्गीता, कुरान और बााइबल इस देश में पढ़े जाते रहेंगे। यह देश सर्वधर्म समन्वय को अपना आदर्श मानता है और हम इसी आदर्श के साथ समाज निर्माण के पथ पर अग्रसर हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को 44वें कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले के उद्घाटन अवसर पर अपने संबोधन में परोक्ष तौर पर सीएए-एनआरसी की ओर इशारा करते हुए ये बातें कहीं।

ममता ने आगे कहा कि इंटरनेट के इस युग में भी पुस्तकों की मांग अनंत है और हमेशा बनी रहेगी। यह पुस्तक मेला अखंड भारत की भावना को दर्शाता है और बंगाल का गौरव है। पुस्तकों का यह त्योहार सभी के लिए है। ममता ने साल्टलेक के सेंट्रल पार्क में लगे पुस्तक मेले का घंटी बजाकर उद्घाटन किया। इस दौरान भारत में रूस के राजदूत कुदाशेव निकोले रिश्तोविच भी उपस्थित थे।

पुस्तक मेला आगामी नौ फरवरी तक चलेगा। रूस इस वर्ष पुस्तक मेले का थीम कंट्री है। इसके अलावा संयुक्त राज्य, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, जापान, वियतनाम, फ्रांस, अर्जेंटीना, ग्वाटेमाला, मैक्सिको, पेरु, आस्ट्रेलिया, बांग्लादेश समेत 11 लैटिन अमेरिकी देश शिरकत कर रहे हैं।

वहीं दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, नगालैंड, असम, उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, केरल, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, तेलगांना और ओडि़शा के प्रकाशकों ने यहां अपने स्टाल लगाए हैं। पुस्तक मेला दोपहर 12 बजे से रात आठ बजे तक चलेगा। आखिरी दिन यह रात नौ बजे तक खुला रहेगा।

पुस्तक मेले के लिए चलेंगी 400 बसें

पुस्तक मेले में आने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग की ओर से विशेष तौर पर बसों की व्यवस्था की गई है। दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन निगम की ओर से इस साल भी पैकेज टूर की व्यवस्था है। पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर, वीरभूम व हुगली जिले के विभिन्न स्थानों के अलावा, आसनसोल और दुर्गापुर से भी पुस्तक मेले के लिए विशेष बसों का संचालन किया जाएगा। पैकेज टूर के अंतर्गत मेले में आने वाले यात्रियों को दोपहर के भोजन के साथ ही पेयजल भी दिया जाएगा। पिछले साल 350 बसों की व्यवस्था की गई थी। इस बार इनकी संख्या बढ़ाकर 400 की गई है। 

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