बंगाल में ममता की गठबंधन की कोशिश विफल, विधानसभा उपचुनाव में कोई दल नहीं आ रहा साथ
ममता बनर्जी का बंगाल में भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने का प्रयास विफल हो गया है, क्योंकि कांग्रेस और वाममोर्चा ने विधानसभा उपचुनावों के लिए अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।
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बंगाल में ममता की गठबंधन की कोशिश विफल।
HighLights
ममता बनर्जी का भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने का प्रयास विफल।
कांग्रेस और वाममोर्चा ने उपचुनावों के लिए उम्मीदवार घोषित किए।
ममता को अब विधानसभा उपचुनाव अकेले लड़ना होगा।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी की बंगाल में भाजपा के विरुद्ध गठबंधन तैयार करने का प्रयास विफल साबित हो रहा है। कांग्रेस ने नंदीग्राम व रेजीनगर में होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। वहीं वाममोर्चा भी अपने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में है।
इंडियन सेक्युलर फ्रंट समेत अन्य राजनीतिक दल भी फिलहाल ममता से हाथ मिलाने के मूड में नहीं हैं। पहले अपनी मर्जी से 'एकला चलो' की राह चुनने वाली ममता को अब मजबूरी में अकेले चलना होगा। विरोधी दलों के साथ ही उनके सामने पार्टी के बागी ऋतब्रत बनर्जी गुट की भी चुनौती होगी।
गत विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता ने कांग्रेस, वाममोर्चा समेत सभी भाजपा विरोधी दलों से साथ आने का आह्वान किया था। उन्होंने अति वामपंथी दलों को भी इसमें शामिल होने का अनुरोध किया था।
कांग्रेस ने उनकी अपील को दरकिनार कर नंदीग्राम से भूमि आंदोलन के नेता मिलन प्रधान व रेजीनगर से पार्टी के जिला परिषद के सदस्य मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी को प्रत्याशी बनाया है। दोनों आगामी 16 सितंबर को नामांकन दाखिल करेंगे।
प्रत्याशियों के नामों पर कांग्रेस हाईकमान की मुहर लग चुकी है। वाममोर्चा की ओर से नंदीग्राम सीट पर भाकपा प्रत्याशी को उतारा जाएगा। रेजीनगर से माकपा अथवा आरएसपी के प्रत्याशी को टिकट दिया जा सकता है।
भाजपा विरोधी अन्य दल भी अपने-अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में ममता को सत्ता गंवाने के बाद पहला विस उपचुनाव अपने बूते ही लड़ना होगा। ममता तृणमूल के नाम व चुनाव चिन्ह पर उपचुनाव लड़ पाएंगी या नहीं, यह भी एक बड़ा प्रश्न है। ऋतब्रत गुट इसपर दावेदारी पेश कर चुका है। मामला फिलहाल चुनाव आयोग के पास लंबित है।
