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ममता बनर्जी गुट को मिला 'फुटबॉल प्लेयर' सिंबल; 'लिफाफा' चिह्न पर चुनाव लड़ेगा अरूप रॉय गुट

Published: Fri, 18 Sep 2026 02:26 PM (IST)Updated: Fri, 18 Sep 2026 02:51 PM (IST)

चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न मिला है, जबकि अरूप रॉय गुट 'लिफाफा' चिह्न पर चुनाव लड़ेगा।

ममता बनर्जी और अरुप रॉय की यह तस्वीर AI की सहायता से संपादित की गई है।

ममता बनर्जी और अरुप रॉय की यह तस्वीर AI की सहायता से संपादित की गई है।

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डिजिटल डेस्क, कोलकाता। चुनाव आयोग ने मूल तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके चुनाव चिह्न पर रोक लगाने के बाद, अब दोनों गुटों को नई आधिकारिक पहचान सौंप दी है।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम आवंटित किया गया है और आगामी चुनावी मैदान में वे 'फुटबॉल खिलाड़ी' के चुनाव चिह्न के साथ उतरेंगे।

ममता गुट का नया नाम ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस

चुनाव आयोग के आदेश के बाद दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को 18 सितंबर की सुबह तक अपने-अपने लिए तीन नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प सौंपने का निर्देश दिया गया था। ममता बनर्जी ने इस फैसले पर अपनी कड़ी आपत्ति जताते हुए गुरुवार रात को अपने विकल्प आयोग को सौंपे थे।

पीटीआई के अनुसार, चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के नए नाम पर अपनी मुहर लगा दी है। ममता गुट को अब आधिकारिक तौर पर 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' का नाम दिया गया है। ममता बनर्जी की पार्टी अब फुटबॉल खिलाड़ी के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरेगी।

अरूप रॉय गुट को मिला 'लिफाफा' चुनाव चिह्न

वहीं दूसरी तरफ, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को भी चुनाव आयोग द्वारा एक नई राजनीतिक पहचान दी गई है। इस गुट को आधिकारिक तौर पर 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम दिया गया है और इन्हें चुनाव चिह्न के रूप में 'लिफाफा' आवंटित किया गया है।

इन नए नामों और चुनाव चिह्नों के आधिकारिक रूप से लागू होने के साथ ही, दोनों गुटों ने एक बड़ी प्रशासनिक बाधा पार कर ली है। अब वे आगामी उपचुनावों के लिए अपने उम्मीदवार उतार सकते हैं, जबकि असली पार्टी की विरासत को लेकर अंतिम विवाद अभी भी जारी है।

चुनाव आयोग का मकसद आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों से पहले दोनों गुटों को समान स्थिति में रखना था, जिसके चलते दोनों पक्षों को मूल नाम और सिंबल के इस्तेमाल से रोक दिया गया था।

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