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भारतीय संग्रहालय में प्रदर्शित हुए मां दुर्गा के बेशकीमती सोने के आभूषण, 212 साल में पहली बार हुआ ऐसा

Published: Sun, 25 Oct 2026 03:21 PM (IST)

कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में 212 साल में पहली बार मां दुर्गा के बेशकीमती स्वर्ण आभूषणों की प्रदर्शनी लगाई गई। ...और पढ़ें

212 साल में पहली बार हुआ ऐसा।

212 साल में पहली बार हुआ ऐसा।

HighLights

  1. भारतीय संग्रहालय में पहली बार मां दुर्गा के स्वर्ण आभूषण प्रदर्शित।

  2. मूर्तिकार नव पाल की प्रतिमा को इन आभूषणों से सजाया गया।

  3. प्राचीन विरासत और आधुनिक कला का अद्भुत संगम दिखा।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोलकाता स्थित भारतीय संग्रहालय के 212 साल के इतिहास में पहली बार मां दुर्गा के बेशकीमती पुरातात्विक स्वर्ण आभूषणों को आम लोगों के अवलोकन के लिए प्रदर्शित किया गया। इस विशेष प्रदर्शनी में चंद्रहार, सीताहार, बाजूबंद, झुमके और हाथों के कंगन सहित कई दुर्लभ आभूषण आकर्षण का केंद्र रहे।

महालया से शुरू हुई इस प्रदर्शनी में कोलकाता के कुम्हारटोली के मूर्तिकार नव पाल द्वारा बनाई गई मां दुर्गा की प्रतिमा को इन प्राचीन आभूषणों की शैली के अनुरूप तैयार किए गए करोड़ों रुपये के स्वर्ण आभूषणों से सजाया गया था।

प्राचीन विरासत और आधुनिक आभूषणों का संगम

प्रदर्शनी में मां दुर्गा से जुड़ी कई पारंपरिक वस्तुओं को भी जगह दी गई। इनमें गुप्तकाल के स्वर्ण सिक्के और ताड़पत्र पर उकेरी गई 19वीं सदी की ‘श्रीश्री दुर्गा स्तोत्र’ पांडुलिपि शामिल थी। उत्तर 24 परगना जिले की पारंपरिक ‘दुर्गा सरा चित्रकला’ भी प्रदर्शित की गई। प्रदर्शनी के दौरान मां दुर्गा से संबंधित कई कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

संग्रहालय प्रशासन और कांथास्टिच (कांथा कढ़ाई) के क्षेत्र में काम करने वाली एक निजी संस्था की संयुक्त पहल पर आयोजित इस प्रदर्शनी का परिसर पारंपरिक कांथा कढ़ाई के बारीक नमूनों से सजाया गया था।

प्रदर्शनी में देवी के सोलह शृंगार के लिए पूरी तरह सोने के आभूषणों का इस्तेमाल किया गया। इनमें नवरात्र के नौ रूपों को दर्शाने वाला विशेष दुर्गा हार, समृद्धि की प्रतीक महालक्ष्मी के आभूषण और ज्ञान-विवेक की प्रतीक मां सरस्वती के हंस की आकृति वाले आभूषण शामिल थे।

प्रतिमा को संरक्षित करने पर विचार

संग्रहालय के एक अधिकारी के अनुसार, प्रदर्शनी में रखे गए सोने के आभूषणों के दो सेटों के इतिहास से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, इतना पता है कि इन्हें 17वीं और 18वीं शताब्दी के दौरान अविभाजित बंगाल के विभिन्न मंदिरों से संग्रहित किया गया था।

रविवार को यह प्रदर्शनी समाप्त होने वाली थी, लेकिन मूर्तिकार नव पाल द्वारा बनाई गई मां दुर्गा की प्रतिमा को संरक्षित करने पर विचार किया जा रहा है। भारतीय संग्रहालय के निदेशक एवं पुरातत्वविद डॉ. सायन भट्टाचार्य ने बताया कि प्रतिमा इतनी सुंदर बनी है कि लोगों का उससे भावनात्मक जुड़ाव हो गया है। इसलिए इसे संरक्षित करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।