कोलकाता, राज्य ब्यूरो। कोरोना की दूसरी लहर ने बंगाल को हिला दिया है। जिस दर से संक्रमण बढ़ रहा है, उससे राज्य में फिलहाल निकाय चुनाव के आसार नहीं दिख रहे हैं। आयोग के अधिकारियों का मानना ​​है कि मौजूदा माहौल में निकाय चुनाव कराना मुमकिन नहीं है। फिलहाल, कोलकाता नगर निगम सहित राज्य की 112 नगरपालिकाओं का कार्यकाल समाप्त हो गया है। इसमें ज्यादातर नगरपालिकाओं का कार्यकाल दो वर्ष पहले ही समाप्त हो चुका था। यहां प्रशासकों की नियुक्ति की गई है। हालांकि तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के तीसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद ही निकाय चुनाव के बारे में सरकार को निर्णय लेना होगा।

इस बात पर भी संदेह है कि सरकार सभी नगरपालिकाओं में एक बार में मतदान कराएगी। सूत्रों का कहना है कि कोरोना महामारी को लेकर राज्य चुनाव आयोग किसी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहता है क्योंकि पिछले दिनों ही विधानसभा चुनावों को लेकर मद्रास हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई थी और कहा था कि इसके लिए आयोग के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। पिछले साल लॉकडाउन से पहले राज्य चुनाव आयोग को कोरोना के कारण चुनाव स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इधर नगर पालिकाओं में निर्वाचित बोर्ड नहीं होने के कारण कोरोना संक्रमण से निपटने में पालिकाओं के काम में कई तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं।

बताते चलें कि चुनाव आयोग ने कोलकाता सहित पांच नगर निगमों के प्रशासन को भंग कर दिया है और अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया है। विधानसभा चुनाव से पहले कुछ लोगों ने कोलकाता नगर निगम सहित विभिन्न नगर पालिकाओं में मतदान नहीं कराए जाने को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन कोरोना के कारण यह संभव नहीं था।