कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़: न्यायिक समिति करेगी कमियों की पहचान, 2027 से पूजा पंडालों में कड़े होंगे सुरक्षा नियम
कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के बाद राज्य सरकार ने 19 मौतों की जांच के लिए एसआइटी गठित की है।

चोरबागान भगदड़ में 19 लोगों की मौत के बाद एसआइटी गठित

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर को हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत की घटना के बाद राज्य सरकार इससे सबक लेते हुए अगले वर्ष से बड़े सामुदायिक पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए एहतियाती कदम उठाने की तैयारी कर रही है।
घटना की लिए राज्य सरकार द्वारा बुधवार को गठित छह सदस्यीय विशेष जांच समिति (एसआइटी) की रिपोर्ट अहम होगी। समिति हादसे के कारणों, भीड़ प्रबंधन में संभावित खामियों और सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय सुझाएगी।
चोरबागान भगदड़ में SIT गठित
राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, समिति की रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन करने के बाद वर्ष 2027 से बड़े पूजा पंडालों के लिए सुरक्षा संबंधी कड़े दिशा-निर्देश निर्धारित किए जा सकते हैं।
इनमें पंडालों में लोगों की अधिकतम संख्या, प्रवेश और निकास के रास्ते, सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था तथा आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल होंगे।
समिति की अध्यक्ष और कलकत्ता उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिंदिता राय सरस्वती ने गुरुवार को बताया कि पैनल को तीन महीने के भीतर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी करने को चुनौतीपूर्ण बताते हुए समय पर रिपोर्ट सौंपने का भरोसा जताया।
उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य हादसे के कारणों का पता लगाने के साथ जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना भी है। समिति के निष्कर्षों के आधार पर दुर्गा पूजा समितियों को आवश्यक निर्देश दिए जा सकते हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
मालूम हो कि बंगाल सरकार ने कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की घटना की व्यापक जांच के लिए एसआइटी का गठन किया है।
राज्य सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के परामर्श से गठित इस दल को घटना के कारणों का पता लगाने, संभावित लापरवाही की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी है। एसआइटी को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी।
सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयान की होगी जांच
समिति हादसे से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन से बनाए गए वीडियो और मृतकों तथा घायलों की मेडिकल रिपोर्ट की जांच करेगी। इसके माध्यम से भगदड़ के घटनाक्रम को समझने और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की पहचान करने का प्रयास किया जाएगा। जांच के दौरान प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
