बंगाल: बाईपास सर्जरी से पहले बुजुर्ग की गर्दन की दोनों धमनियों में स्टेंट डालकर टाला स्ट्रोक का खतरा, डॉक्टरों ने किया कमाल
कोलकाता के सीके बिरला अस्पताल में डॉक्टरों ने एक बुजुर्ग मरीज की कोरोनरी बाइपास सर्जरी से पहले गर्दन की दोनों कैरोटिड धमनियों में एंजियोप्लास्टी कर स्टेंट डाले।

बाइपास सर्जरी से पहले कैरोटिड धमनियों में एंजियोप्लास्टी की गई (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
बाइपास सर्जरी से पहले कैरोटिड धमनियों में एंजियोप्लास्टी की गई
गंभीर रुकावट के कारण स्ट्रोक का खतरा टालने हेतु स्टेंट डाले
न्यूनतम चीर-फाड़ प्रक्रिया से रक्त प्रवाह बेहतर हुआ, मरीज स्वस्थ
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोलकाता के सीके बिरला अस्पताल, सीएमआरआइ में डाक्टरों ने एक बुजुर्ग मरीज की कोरोनरी बाइपास सर्जरी से पहले गर्दन की दोनों कैरोटिड धमनियों में एंजियोप्लास्टी कर स्टेंट डाले।
इन धमनियों में गंभीर रुकावट के कारण सर्जरी के दौरान स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता था। डाक्टरों ने एक ही सत्र में न्यूनतम चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया के जरिए दोनों धमनियों को खोलकर रक्त प्रवाह बेहतर किया। अस्पताल के अनुसार, प्रक्रिया के बाद मरीज की हालत अच्छी है।
बाइपास सर्जरी से पहले एंजियोप्लास्टी की गई
अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोलाजिस्ट डा. दीप दास के अनुसार, गर्दन के दोनों ओर मौजूद कैरोटिड धमनियां मस्तिष्क, चेहरे और सिर तक रक्त पहुंचाती हैं। इनमें गंभीर संकुचन होने के बावजूद कई बार स्पष्ट लक्षण सामने नहीं आते।
ऐसे में हृदय की बाइपास सर्जरी के दौरान स्ट्रोक जैसी गंभीर जटिलता का जोखिम हो सकता है। इसलिए सर्जरी से पहले इन धमनियों की स्थिति का पता लगाना महत्वपूर्ण है।
निगरानी के साथ पूरी की गई प्रक्रिया
डाक्टरों ने गुब्बारे की मदद से धमनियों के संकरे हिस्सों को चौड़ा किया और उन्हें खुला रखने के लिए स्टेंट लगाए। इस दौरान मरीज के रक्तचाप और हृदय गति पर लगातार नजर रखी गई। साथ ही, खून का थक्का बनने से रोकने वाली दवाओं के इस्तेमाल और प्रस्तावित बाइपास सर्जरी के बीच तालमेल का ध्यान रखा गया।
डाक्टरों के मुताबिक, ऐसे मामलों में इलाज का निर्णय मरीज की व्यक्तिगत स्थिति और हृदय तथा मस्तिष्क से जुड़े जोखिमों का आकलन करने के बाद लिया जाता है। विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर इस प्रक्रिया की जानकारी साझा की गई।
