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बंगाल में केएमसी के पोस्टर पर घमासान, ममता तृणमूल ने ‘हिंदी थोपने’ का लगाया आरोप

Published: Sun, 11 Oct 2026 07:03 PM (IST)

तृणमूल कांग्रेस ने पोस्टर में हिंदी-बांग्ला मिश्रण को लेकर भाजपा पर बांग्ला भाषा विकृत करने और हिंदी थोपने का आरोप लगाया है।

बंगाल में केएमसी के पोस्टर पर घमासान।

बंगाल में केएमसी के पोस्टर पर घमासान।

HighLights

  1. KMC पोस्टर पर हिंदी-बांग्ला मिश्रण से विवाद शुरू।

  2. तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया।

  3. पोस्टर बदलने की मांग, आगामी चुनाव पर असर संभव।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। दुर्गा पूजा में कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की ओर से शुरू किए गए स्वच्छता अभियान के पोस्टर को लेकर बंगाल में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

पोस्टर में बांग्ला और हिंदी के शब्दों को मिलाकर लिखे गए वाक्यांश पर ममता तृणमूल कांग्रेस कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी ने भाजपा सरकार पर बांग्ला भाषा को विकृत करने और बंगाल पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया है।

केएमसी ने 10 से 21 अक्टूबर तक चलने वाले स्वच्छता अभियान के प्रचार के लिए इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्टर साझा किया है। इसमें लिखा है, ‘मायेर कोरबो स्वच्छता से स्वागत’। इस वाक्यांश में बांग्ला और हिंदी के शब्दों का मिश्रण है। अभियान का उद्देश्य दुर्गा पूजा के दौरान शहर को स्वच्छ रखना और लोगों को सफाई के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाना है।

इस पोस्टर पर ममता तृणमूल ने आपत्ति जताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए राज्य की भाजपा सरकार को निशाने पर लिया है। पार्टी ने कहा कि नगर निगम की ओर से जारी सामग्री में भाषा संबंधी गलतियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उसने आरोप लगाया कि दिल्ली में बैठे अपने नेताओं को खुश करने के लिए बंगाल पर जबरन हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है।

तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी पोस्टर साझा कर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि अब उन्हें यह सोचकर हैरानी होने लगी है कि क्या बचपन में उन्होंने बांग्ला गलत सीखी थी या फिर बिना किसी को बताए भाषा ही बदल गई है।

कुणाल घोष ने की पोस्टर बदलने की मांग

तृणमूल विधायक एवं प्रवक्ता कुणाल घोष ने पोस्टर की भाषा पर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल हटाने और सही बांग्ला में लिखे संदेश के साथ दोबारा जारी करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा बंगाल की भाषा और संस्कृति को नुकसान पहुंचा रही है।

इस विवाद पर केएमसी या राज्य सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। फिलहाल नगर निगम का कामकाज प्रशासक के हाथों में है। इस साल के अंत में केएमसी चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में पोस्टर को लेकर उठा विवाद आगामी चुनाव से पहले भाषा और सांस्कृतिक पहचान के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला सकता है।