'अलग गोरखालैंड बना तो देना होगा अलग कामतापुर राज्य', बंगाल की राजनीति में अलग राज्य की मांग तेज
उत्तर बंगाल में अलग राज्य की मांग को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गोरखालैंड की ...और पढ़ें

HighLights
गोरखालैंड की मांग पर कामतापुर पीपुल्स पार्टी की चेतावनी।
केंद्र के मध्यस्थ से बैठक में अलग राज्य की मांग।
कामतापुर राज्य की मांग पुरानी, राजबंशी समुदाय से जुड़ी।
जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी। उत्तर बंगाल की राजनीति में अलग राज्य की मांग को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त मध्यस्थ पंकज कुमार सिंह के साथ हुई बैठक में दार्जिलिंग पहाड़ के कई राजनीतिक दलों ने अलग गोरखालैंड राज्य की मांग उठाई है। इसमें तराई और डुवार्स के सैकड़ों मौजों को भी शामिल करने की मांग की गई है।
इस पर कामतापुर पीपुल्स पार्टी (केपीपी) ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि यदि अलग गोरखालैंड राज्य के गठन की पहल होती है तो अलग कामतापुर राज्य की मांग पर भी विचार करना होगा। ऐसा नहीं होने पर पार्टी ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
कामतापुर राज्य की मांग काफी पुरानी
केपीपी की केंद्रीय कमेटी के अध्यक्ष बुधारू राय ने कहा कि कामतापुर राज्य की मांग काफी पुरानी है। बंगाल सरकार और केंद्र सरकार को इस दिशा में भी पहल करनी चाहिए। यदि इस मांग को नजरअंदाज किया गया तो पार्टी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।
पहाड़ की समस्या का समाधान तलाशने की पहल
दरअसल, पहाड़ की समस्या का स्थायी राजनीतिक समाधान तलाशने के लिए हाल ही में दार्जिलिंग में केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त मध्यस्थ पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज कुमार सिंह ने प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव अरविंद खेर और राज्य की गृह सचिव संघमित्रा घोष भी मौजूद थीं।
अलग राज्य के गठन से ही स्थायी समाधान
इसमें गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के शीर्ष नेतृत्व ने तराई और डुवार्स के मैदानी इलाकों के 396 मौजों को नई स्वायत्तशासी संस्था में शामिल करने की मांग रखी। वहीं, गोरखालैंड एपेक्स कमेटी और इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट ने स्पष्ट किया कि पहाड़, तराई और डुवार्स की समस्याओं का स्थायी समाधान अलग राज्य के गठन से ही संभव है। उसके बाद ही केपीपी नेता भड़के हुए हैं।
अलग कामतापुर की मांग भी काफी पुरानी
गोरखालैंड की तरह अलग कामतापुर राज्य की मांग भी काफी पुरानी है। उत्तर बंगाल में राजबंशी समुदाय की भाषाई, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय पहचान के साथ इस आंदोलन का गहरा संबंध रहा है। 1990 के दशक में यह आंदोलन हिंसक भी हुआ। केपीपी की मांग प्रस्तावित कामतापुर राज्य में कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा के साथ असम के कुछ क्षेत्रों को शामिल करने की रही है। आंदोलन के समर्थकों का तर्क है कि राजबंशी समुदाय की पहचान, भाषा, विकास और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों का समाधान अलग राज्य के गठन से ही संभव होगा।
