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46 साल से गायब है कालीघाट मंदिर के खजाने वाले बैंक लॉकर की चाबी, तिजोरी में क्या-क्या?

Published: Tue, 08 Sep 2026 05:58 PM (IST)

कालीघाट मंदिर में देवी काली के गहनों वाले बैंक लॉकर की चाबी 46 साल से गायब है। परिषद ने अदालत ...और पढ़ें

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HighLights

  1. कालीघाट मंदिर के बैंक लॉकर की चाबी 46 साल से गायब।

  2. साबर्ण रायचौधरी परिवार परिषद ने अदालत में मामला दर्ज कराया।

  3. मंदिर की संपत्ति का हिसाब और एफआईआर की मांग।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कालीघाट मंदिर में देवी काली के गहनों और अन्य कीमती वस्तुओं को लेकर साबर्ण रायचौधरी परिवार परिषद ने दक्षिण 24 परगना जिला अदालत में मामला किया है। परिषद ने आरोप लगाया है कि देवी के गहने व अन्य मूल्यवान सामान जिस बैंक लॉकर में रखे जाते हैं, उसकी चाबी 1980 से गायब है।

परिषद ने अदालत से लॉकर की चाबी बरामद कराने, मंदिर की संपत्तियों का हिसाब-किताब कराने और उनकी वर्तमान स्थिति की जांच कराने का अनुरोध किया है। अनियमितता या हेराफेरी सामने आने पर एफआईआर दर्ज करने की अपील की है। मालूम हो कि साबर्ण रायचौधरी परिवार कोलकाता के सबसे पुराने जमींदार परिवारों में से एक है।

परिवार कालीघाट से 16वीं शताब्दी से संबंध होने का दावा करता है और कालीघाट की वर्तमान प्रतिमा को अपनी कुलदेवी भुवनेश्वरी का स्वरूप मानता है। परिषद के सचिव देबर्षि रायचौधरी के अनुसार, चाबी नहीं मिलने के कारण यह पता नहीं चल सका है कि तिजोरी में क्या-क्या है और संपत्तियां सुरक्षित हैं या नहीं।

मंदिर की संपत्तियों का हिसाब रखने वाली समिति का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है और लंबे समय से समुचित लेखा-जोखा नहीं हुआ है। 2014 के बाद से मंदिर प्रबंधन समिति का चुनाव नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार समिति का कार्यकाल पांच वर्ष होना चाहिए।

इसमें पांच निर्वाचित और छह बाहरी सदस्य होने का प्रावधान है। दक्षिण 24 परगना के जिला न्यायाधीश इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। श्रद्धालुओं के दान की निगरानी को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देशों के बावजूद नियमों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया है।

2006 में भी उठे थे सवाल
मंदिर की आर्थिक व्यवस्था को लेकर 2006 में भी कलकत्ता हाई कोर्ट में मामला हुआ था। तब आरोप लगा था कि मंदिर में किया गया दान निर्धारित स्थान पर नहीं पहुंच रहा है। पूजा के समय के स्लाट को बाहरी लोगों को बेचने का आरोप भी सामने आया था। इस बीच मंदिर के कोषाध्यक्ष कल्याण हलदर ने समिति के चुनाव में देरी की बात स्वीकार की है।

उनके अनुसार, सचिव की मृत्यु और अध्यक्ष के अस्वस्थ होने के कारण प्रक्रिया में विलंब हुआ। अब चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसकी जानकारी जिला न्यायाधीश को दी गई है। दिसंबर तक चुनाव पूरा होने की उम्मीद है।