इटली में भारत का ध्वज लहराएंगी बंगाल की बेटी; विश्व कैरम चैंपियनशिप के लिए हुगली की काजल सिंह का चयन
हुगली की काजल सिंह इटली में होने वाली विश्व कैरम चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। उन्होंने राष्ट्रीय रैंकिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर भारतीय टीम में जगह बनाई है।

काजल सिंह इटली में लहराएंगी भारत का परचम

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विशाल श्रेष्ठ, कोलकाता। पिता को कैरम खेलते देख नौ साल की बच्ची के मन में स्ट्राइकर थामने का शौक जगा। तब शायद ही किसी ने सोचा था कि हुगली जिले के उत्तरपाड़ा की छोटी सी कैरम अकादमी से शुरू हुआ सफर एक दिन उसे कैरम के वैश्विक मंच पर ले जाएगा।
उत्तरपाड़ा के माखला इलाके की रहने वालीं काजल सिंह इटली के चियांशियानो तेरमे शहर में होने वाली विश्व कैरम चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। 30 साल की काजल बंगाल से चुनी गई एकमात्र महिला खिलाड़ी हैं। गत सितंबर में दिल्ली में हुई नेशनल रैंकिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने भारतीय कैरम टीम में अपनी जगह पक्की की।
विश्व कैरम चैंपियनशिप आगामी 30 नवंबर से छह दिसंबर तक आयोजित होगी। इसके लिए काजल रोजाना सात-आठ घंटे अभ्यास कर रही हैं।
14 साल की उम्र में विश्व चैंपियन को हराया
काजल ने 2010 में गुवाहाटी में हुई सीनियर नेशनल चैंपियनशिप के प्री-क्वार्टरफाइनल मैच में महज 14 साल की उम्र में तत्कालीन विश्व चैंपियन भारत की एस अपूर्वा को हराकर अपनी क्षमता दिखाई थी। इससे पहले 2008-09 में गुजरात के वडोदरा में हुई अंडर-12 नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने पहली बार खिताब जीता। नेशनल चैंपियन होने के साथ वह तीन बार पूर्वी क्षेत्र की चैंपियन भी हैं।
हाथ के हुनर के साथ दिमाग का भी खेल
काजल कहती हैं कि कैरम में हाथ के हुनर के साथ दिमाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। हर स्ट्राइक के बाद बोर्ड पर स्थिति बदल जाती है। उसके अनुसार रणनीति तैयार करनी पड़ती है। गेम के दौरान काजल की नजर सबसे अधिक लाल गोटी यानी क्वीन पर रहती है।
राष्ट्रीय व विश्व स्तर की कैरम प्रतियोगिताएं 29 इंच के बोर्ड पर खेली जाती हैं। एक सेट में आठ बोर्ड होते हैं और कुल 25 अंकों का लक्ष्य रहता है। आठ बोर्ड पूरे होने पर अधिक अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी उस सेट का विजेता बनता है। यदि कोई खिलाड़ी पहले ही 25 अंक तक पहुंच जाता है, तो सेट जीत जाता है। एक गेम में कुल तीन सेट होते हैं। दो सेट जीतने वाला अंतत: विजेता होता है।
काजल ने कैरम का ककहरा स्थानीय प्लूटो एकेडमी में सीखा। उसके पिता विजय कुमार सिंह केंद्र सरकार के कर्मचारी व मां सुनीता सिंह गृहिणी हैं।
