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बंगाल: जादवपुर विश्वविद्यालय में पीएम उषा समिति गठित, ढांचागत विकास से शोध तक को मिलेगी गति

Published: Sat, 19 Sep 2026 09:43 PM (IST)

जादवपुर विश्वविद्यालय में पीएम उषा योजना के तहत 24 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य केंद्रीय अनुदान ...और पढ़ें

जादवपुर विश्वविद्यालय।

जादवपुर विश्वविद्यालय।

HighLights

  1. जादवपुर विश्वविद्यालय में पीएम उषा योजना के तहत समिति गठित।

  2. समिति केंद्रीय अनुदान के उपयोग की प्राथमिकताएं तय करेगी।

  3. ढांचागत सुविधाओं और शोध कार्यों को मिलेगी नई गति।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। जादवपुर विश्वविद्यालय में केंद्रीय अनुदान योजना ‘पीएम उषा’ के तहत 24 सदस्यीय समिति गठित की गई है। अस्थायी रजिस्ट्रार देबजीत दत्त को समिति का संयोजक बनाया गया है।

समिति तय करेगी कि विश्वविद्यालय के लिए मिलने वाले अनुदान का उपयोग किन क्षेत्रों में किया जाए और उसके लिए प्रस्ताव तैयार कर कार्यसमिति के समक्ष रखा जाएगा। विश्वविद्यालय प्रबंधन को उम्मीद है कि इससे ढांचागत सुविधाओं से लेकर शोध तक के काम को गति मिलेगी।

पीएम उषा विश्वविद्यालयों को वित्तीय सहायता देने वाली केंद्र की योजना है, जिसका पहले नाम रूसा था। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य सरकार ने पीएम उषा योजना को मंजूरी दी और केंद्र के साथ समझौता भी किया। इसके बाद जादवपुर विश्वविद्यालय में योजना के तहत समिति गठित की गई है।

समिति अनुदान प्राप्त करने और उसके खर्च की प्राथमिकताएं तय करेगी। प्रस्ताव तैयार होने के बाद उसे विश्वविद्यालय की कार्यसमिति में पेश किया जाएगा। विश्वविद्यालय को हाल में सरकार की ओर से वित्तीय सहायता का आश्वासन भी मिला था। इसके तहत 250 करोड़ रुपये मंजूर किए जा चुके हैं।

समिति गठन पर सवाल, प्रबंधन ने आरोप खारिज किए

समिति के गठन को लेकर विश्वविद्यालय में विवाद भी शुरू हो गया है। जादवपुर के डीन, कार्यसमिति के सदस्यों और विभिन्न विभागाध्यक्षों ने कुलपति चिरंजीव भट्टाचार्य को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि समिति का गठन निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं किया गया।

वहीं, विश्वविद्यालय प्रबंधन ने समिति गठन में किसी तरह की अनियमितता से इन्कार किया है। इससे पहले योजना के नाम में ‘पीएम’ जोड़े जाने को लेकर तत्कालीन तृणमूल सरकार ने आपत्ति जताई थी। उसका तर्क था कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में है और शिक्षा के लिए केंद्र व राज्य दोनों वित्तीय योगदान देते हैं।

योजना को मंजूरी नहीं मिलने के कारण राज्य के विश्वविद्यालय केंद्रीय अनुदान से वंचित रहे थे। अब नई व्यवस्था के तहत जादवपुर विश्वविद्यालय में अनुदान के इस्तेमाल की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।