यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 30, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दार्जिलिंग मसले पर सर्वदलीय बैठक में ममता का पृथक राज्य पर बात करने से साफ इन्कार
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा प्रमुख विमल गुरुंग ने बैठक में गोरखालैंड के मुद्दे पर बातचीत नहीं होने पर नाराजगी जताई और बंद वापस लेने से इन्कार कर दिया।

कोलकाता, [राज्य ब्यूरो]। गोरखालैंड' की मांग पर पहाड़ में पिछले 78 दिनों से जारी बंद के बीच दार्जिलिंग मसले के हल को ममता सरकार की ओर से मंगलवार को राज्य सचिवालय में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में कुछ ठोस निकलकर तो सामने नहीं आया, लेकिन पिछले दो माह से अधिक समय से जारी गतिरोध खत्म हुआ और सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (गोजमुमो) की अगुवाई वाली पहाड़ की पार्टियों के बीच बातचीत का दौर आखिरकार शुरू हुआ।
बैठक के बाद दोनों पक्षों के रवैए से इस बात के जरूर संकेत मिले कि पहाड़ पर जमी बर्फ पिघलनी शुरू हुई है। दार्जिलिंग मसले पर अगली बैठक 12 सितंबर को सिलीगुड़ी स्थित मिनी राज्य सचिवालय 'उत्तर कन्या' में अपरान्ह तीन बजे से होगी।
बैठक शुरू होते ही उठा अलग राज्य का मसला
बैठक शुरू होते ही पहाड़ की पार्टियों ने गोरखालैंड की मांग उठाई, जिसपर मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अपनी मांग रखने को स्वतंत्र हैं लेकिन अलग राज्य का मुद्दा राज्य सरकार के अधिकार में नहीं है इसलिए वे इस मुद्दे पर कोई बात नहीं कर सकतीं। दोनों पक्षों के बीच बातचीत का द्वार खुला है और यह महत्वपूर्ण है। ममता ने पहाड़ में जारी बेमियादी बंद खत्म करने की अपील की, जिसपर राजनीतिक दलों ने दार्जिलिंग लौटकर आपस में बैठक कर अपना रुख स्पष्ट करने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने बैठक को बताया सकारात्मक व संतोषजनक
लगभग डेढ़ घंटे चली बैठक को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सकारात्मक व संतोषजनक बताया। बैठक में गोजमुमो की तरफ से विनय तमांग, आरवी भूजेल, अनित थापा, सेरित दहाल और बोहित थापा, जीएनएलएफ की ओर से महेंद्र छेत्री और जन आंदोलन पार्टी की तरफ से हरका बहादुर छेत्री शामिल हुए। बैठक के बाद पहाड़ के सभी दलों को साथ लेकर संवाददाता सम्मेलन कर मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी ने पहाड़ में शांति बहाली और जनजीवन सामान्य करने पर सहमति जताई है।
गोजमुमो समर्थकों पर हुए अत्याचार की सीबीआइ जांच हो : विनय
बैठक के बाद गोजमुमो नेता विनय तमांग ने कहा कि उन्होंने गोरखालैंड की मांग के साथ पहाड़ पर आंदोलन के दौरान उनपर हुए अत्याचारों की सीबीआइ जांच की मांग की है। आंदोलन के दौरान उनके 8 समर्थक मारे गए जबकि 45 लोग जख्मी हुए हैं। राज्य सरकार से इस बाबत क्षतिपूर्ति देने की भी मांग की गई है। तमांग ने कहा कि पहाड़ में हुए बम धमाकों की वे भी निंदा करते हैं। सरकार इसकी भी केंद्रीय एजेंसी से जांच करा सकती है। उन्होंने गोजमुमो समर्थकों के खिलाफ दायर सभी मामलों को उठा लेने की भी मांग की।
जीएनएलएफ के महेंद्र छेत्री ने कहा कि उनकी पार्टी की ओर से ही बैठक बुलाने की मुख्यमंत्री से अपील की गई थी। इतने दिनों बाद पहाड़ पर गतिरोध दूर करने को लेकर बैठक हुई है। यह सकारात्मक है।
जन आंदोलन पार्टी के नेता हरका बहादुर छेत्री ने कहा कि वे भी गोरखालैंड के पक्ष में हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मुद्दे पर केंद्र से त्रिपक्षीय बैठक बुलाने की सिफारिश करने की अपील की है। उन्होंने गोरखालैंड पर विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजने की भी मुख्यमंत्री से अपील की।
गुरुंग का बंद वापस लेने से इन्कार
दूसरी ओर गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के प्रमुख विमल गुरुंग ने बैठक में गोरखालैंड के मुद्दे पर बातचीत नहीं होने पर नाराजगी जताई और बंद वापस लेने से इन्कार कर दिया। गुरुंग ने कहा कि जब गोरखालैंड पर बातचीत नहीं हुई तो प्रतिनिधियों को बैठक से निकल आना चाहिए था।
मिरिक नपा के पास फेंके गए सॉकेट बम
नवान्न में बैठक से दो घंटे पहले मिरिक नगरपालिका के पास कुछ लोगों ने सॉकेट बम फेंके, हालांकि वे फटे नहीं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक दोपहर 2 बजे कुछ लोग कृष्णनगर स्थित मिरिक नगरपालिका के सामने बम फेंककर भाग गए। गनीमत रही कि बम फटे नहीं। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उनपर पानी डालकर उन्हें निष्कि्रय कर दिया। मिरिक थाने में मामले की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस बीच एक तरफ जहां नवान्न में बैठक चल रही थी, वहीं दार्जिलिंग में पृथक राज्य की मांग पर गोजमुमो समर्थकों की ओर से विशाल जुलूस निकाला गया।
