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त्रिपुरा में उच्च शिक्षा और शोध को बढ़ावा देगा IIT खड़गपुर, बनेगा नवाचार केंद्र

Published: Thu, 29 Oct 2026 08:22 PM (IST)

आईआईटी खड़गपुर और त्रिपुरा सरकार ने राज्य में उच्च शिक्षा, शोध और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक सहयोग किया है।

आईआईटी खड़गपुर और त्रिपुरा सरकार का समझौता

आईआईटी खड़गपुर और त्रिपुरा सरकार का समझौता

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पूर्वोत्तर में उच्च शिक्षा, शोध और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आइआइटी खड़गपुर ने त्रिपुरा सरकार के साथ रणनीतिक सहयोग की पहल की है। इसके तहत राज्य में उन्नत शिक्षा, शोध एवं नवाचार केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है।

आईआईटी खड़गपुर और त्रिपुरा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने गुरुवार को इस संबंध में आशय पत्र (एलओआइ) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यार्थियों को रोजगार और उद्यमिता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

प्रस्तावित सेंटर फॉर एडवांस्ड लर्निंग, रिसर्च एंड इनोवेशन (सीएएलआरआइ) को आइआइटी खड़गपुर के शैक्षणिक मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से विकसित किया जाएगा। यहां उभरती तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित शिक्षा, बहुविषयक शोध और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की योजना है। केंद्र के माध्यम से स्टार्टअप, उद्यमिता और स्थानीय विकास से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के समाधान पर भी काम किया जाएगा।

इसके अलावा, आईआईटी खड़गपुर त्रिपुरा तकनीकी विश्वविद्यालय को पाठ्यक्रम के आधुनिकीकरण, शिक्षकों के प्रशिक्षण, प्रयोगशालाओं के विकास, शोध सुविधाओं और संस्थागत गुणवत्ता सुधारने में सहयोग देगा। राज्य के सरकारी डिग्री कालेजों में उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कौशल विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करने की भी योजना है।

स्थानीय उद्योगों और रोजगार पर रहेगा जोर

इस सहयोग में बांस, प्राकृतिक रबर, चाय, कृषि और प्राकृतिक गैस जैसे त्रिपुरा के प्रमुख संसाधनों पर आधारित शोध एवं तकनीकी समाधान विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों के साथ उद्योगों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और स्टार्टअप को जोड़ने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इससे स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहन मिलने और रोजगार के नए अवसर तैयार होने की उम्मीद है।

योजना को जमीन पर उतारने के लिए संयुक्त संचालन समिति गठित करने और पांच वर्षीय विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का प्रस्ताव है। इसमें आधारभूत ढांचे, शैक्षणिक कार्यक्रमों, शोध परियोजनाओं, वित्तीय जरूरतों और क्रियान्वयन के लक्ष्यों का खाका तैयार किया जाएगा। परियोजना के लिए केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों से संभावित वित्तीय सहायता लेने पर भी विचार किया जाएगा।