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'पुरानी बीमारी की जानकारी नहीं देने का हवाला देकर पति नहीं करा सकता विवाह रद', कलकत्ता HC का आदेश

Published: Wed, 23 Sep 2026 02:24 PM (IST)Updated: Wed, 23 Sep 2026 02:36 PM (IST)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पत्नी की पुरानी बीमारी की जानकारी छिपाने के आधार पर विवाह रद करने की पति की याचिका खारिज कर दी।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खारिज की पति की याचिका। (फाइल फोटो।)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खारिज की पति की याचिका। (फाइल फोटो।)

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। शादी से पहले पत्नी की पुरानी बीमारी की जानकारी नहीं देने को आधार बनाकर विवाह रद कराने की मांग करने वाले पति को कलकत्ता हाई कोर्ट ने कोई राहत नहीं दी।

न्यायमूर्ति देवांशु बसाक और न्यायमूर्ति आर्य दत्त की डिवीजन बेंच ने कहा कि केवल बीमारी की जानकारी न दिया जाना अपने आप में धोखाधड़ी नहीं है। इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि पत्नी या उसके परिवार ने जानबूझकर तथ्य छिपाकर पति को विवाह के लिए सहमत कराया।

पति को देने होंगे एक लाख रुपये

अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए पति की याचिका खारिज कर दी। साथ ही पत्नी को मुकदमे के सिलसिले में अदालत लाने के लिए पति को एक लाख रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का निर्देश दिया। यह राशि चार सप्ताह में देनी होगी।

2016 में हुई थी शादी, बीमारी छिपाने का आरोप

दंपती का विवाह 22 फरवरी 2016 को अलीपुर में सामाजिक रीति और रजिस्ट्री, दोनों तरीके से हुआ था। शादी के कुछ दिन बाद पत्नी की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। पति का दावा था कि पत्नी को 2007 से एक पुरानी शारीरिक समस्या थी, जिसकी जानकारी शादी से पहले उसे और उसके परिवार को नहीं दी गई।

उसका कहना था कि अगर उसे बीमारी के बारे में पहले पता होता तो वह शादी के लिए सहमत नहीं होता। इसी आधार पर उसने अलीपुर अदालत में विवाह रद करने की मांग की थी।

पत्नी ने आरोप से किया इन्कार

पत्नी ने आरोप से इन्कार करते हुए कहा कि शादी से पहले दोनों परिवारों के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य पारिवारिक विषयों पर चर्चा हुई थी। उसका यह भी कहना था कि चिकित्सा संबंधी दस्तावेज पति के पिता को भेजे गए थे। अलीपुर अदालत ने माना था कि पत्नी की ओर से धोखाधड़ी कर शादी करने की बात साबित नहीं हुई और पति की याचिका खारिज कर दी थी।

हाई कोर्ट ने कहा, मंशा से जुड़ा प्रमाण जरूरी

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि पति शादी से केवल आठ दिन पहले अमेरिका से भारत आया था। ऐसे में उसने होने वाली पत्नी या उसके परिवार से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी क्यों नहीं मांगी, यह भी महत्वपूर्ण है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी जानकारी का न दिया जाना मात्र अपने आप में धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। पीठ ने यह भी कहा कि पति को साबित करना होगा कि पत्नी या उसके परिवार ने जानबूझकर बीमारी की जानकारी छिपाई और इसी उद्देश्य से उसे विवाह के लिए सहमत कराया गया। सुनवाई के दौरान पेश किए गए वाट्सऐप चैट के स्क्रीनशाट भी अदालत को विवाह के समय धोखाधड़ी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं लगे।

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