मिट्टी, कारीगर और लोककला की कालजयी विरासत दिखाएगा हाजरा पार्क का पंडाल
हाजरा पार्क दुर्गोत्सव कमेटी अपने 84वें वर्ष में 'चिरायत' थीम के जरिए बंगाल की कालजयी कलात्मक विरासत को प्रस्तुत कर रही है।

हाजरा पार्क दुर्गोत्सव की 'चिरायत' थीम बंगाल की कला दर्शाएगी

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राज्य ब्यूरो, कोलकाता। हाजरा पार्क दुर्गोत्सव कमेटी अपने 84वें वर्ष में बंगाल की कालजयी कलात्मक विरासत को ‘चिरायत’ थीम के जरिए सामने लाने जा रही है।
पूजा पंडाल में बंगाल की मिट्टी, लोक परंपराओं, कारीगरों की मेहनत और पीढ़ियों से चली आ रहीं कला शैलियों की झलक देखने को मिलेगी।
लकड़ी की हाथ से बनी गुड़िया, डोकरा धातु कला, टेराकोटा समेत बंगाल की विभिन्न पारंपरिक कलाओं को पंडाल की सज्जा का हिस्सा बनाया गया है।

दुर्गोत्सव कमेटी के संयुक्त सचिव सायन देब चटर्जी ने बताया-चिरायत का मूल विचार बंगाल के अतीत और उसकी बदलती सांस्कृतिक चेतना के बीच के रिश्ते को सामने लाना है।
थीम का संदेश है कि समय बदलता है, सभ्यताएं आगे बढ़ती हैं, लेकिन सच्ची कला और उससे जुड़ी मानवीय संवेदना कभी समाप्त नहीं होती।

थीम के माध्यम से लोगों को बंगाल की जड़ों, मिट्टी, परंपराओं और उन कारीगरों तक वापस ले जाने का प्रयास किया जाएगा, जिन्होंने पीढ़ियों से सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखा है। लोक कलाएं केवल सुंदर वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि उनमें बंगाल की कहानियां, स्मृतियां, मान्यताएं और पहचान भी बसी हुई हैं।
तेजी से बदलती दुनिया में इन परंपराओं के पीछे छिपी मानवीय भावना को सामने लाना जरूरी है। इस बार पूजा की कलात्मक परिकल्पना मशहूर कलाकार और मूर्तिकार बिमान साहा ने की है। उन्होंने पंडाल के साथ प्रतिमा को भी बंगाल की पारंपरिक कला शैली की समझ के अनुरूप आकार दिया है।

प्रयास है कि पंडाल में आने वाले लोग प्राचीन कला, उसकी बनावट और दृश्य परंपराओं से जुड़ाव महसूस करें, लेकिन उसे एक आधुनिक कलात्मक दृष्टिकोण से भी देख सकें। पंडाल में बंगाल की लोक और पारंपरिक कला की कई विधाओं को एक साथ पिरोया गया है।
लकड़ी की गुड़िया से लेकर डोकरा धातु कला और टेराकोटा तक, हर प्रस्तुति बंगाल की सांस्कृतिक स्मृति का एक अलग अध्याय सामने लाती है।
इन कलाओं के पीछे काम करने वाले कारीगरों की भूमिका को भी प्रस्तुति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। कलात्मक परिवेश में देवी दुर्गा को रचनात्मकता, कारीगरी, परंपरा और मानवीय श्रम की गरिमा के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
