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जीएसआई के लिए दो तटीय अनुसंधान पोतों का जीआरएसई में निर्माण कार्य शुरू, समुद्री खनिज खोज को मिलेगी मजबूती

Published: Tue, 15 Sep 2026 11:00 PM (IST)

कोलकाता स्थित जीआरएसई ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के लिए दो तटीय अनुसंधान पोतों का निर्माण कार्य शुरू किया है, जिसकी कील स्थापना की गई।

समुद्री खनिज खोज को मिलेगी मजबूती।

समुद्री खनिज खोज को मिलेगी मजबूती।

HighLights

  1. जीआरएसई ने जीएसआई के लिए दो तटीय अनुसंधान पोतों की कील रखी।

  2. ये पोत समुद्री खनिज अन्वेषण और अनुसंधान के लिए उपयोगी होंगे।

  3. आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत पोत निर्माण से क्षमता बढ़ेगी।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान को मजबूती देते हुए कोलकाता स्थित सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रम व नवरत्न कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के लिए बनाए जा रहे दो तटीय अनुसंधान पोतों की मंगलवार को कील स्थापित की।

कोलकाता में जीआरएसई यार्ड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जीएसआई की पहली महिला महानिदेशक वर्षा अशोक अगलावे की उपस्थिति में दोनों पोतों के निर्माण के लिए कील रखी गईं। समारोह में जीआरएसई, जीएसआई, टीएनएसएल और भारतीय पोत रजिस्टर के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कील स्थापना पोत निर्माण की शुरुआत एवं एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसी केंद्रीय ढांचे के आसपास पोत की पूरी संरचना तैयार होती है।

अधिकारियों ने बताया कि दोनों तटीय अनुसंधान पोतों की लंबाई 64 मीटर और चौड़ाई 13 मीटर होगी। इनका वजन करीब 461 टन होगा। पोत 15 दिनों तक लगातार समुद्र में संचालन कर सकेंगे और इनकी अधिकतम गति 10 समुद्री मील होगी। प्रत्येक पोत पर 35 लोगों के रहने की व्यवस्था होगी।

इन पोतों का इस्तेमाल समुद्र में भूवैज्ञानिक मानचित्रण, खनिज अन्वेषण और ड्रेजिंग, समुद्री पर्यावरण की निगरानी तथा अनुसंधान के लिए किया जाएगा। इनमें आधुनिक वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं भी होंगी, जहां आंकड़ों के प्रसंस्करण और नमूनों के विश्लेषण की सुविधा उपलब्ध रहेगी।

इन पोतों में डायनेमिक पोजिशनिंग-1 प्रणाली लगाई जाएगी, जिससे वे समुद्र की स्थिति-3 तक अपनी स्थिति बनाए रख सकेंगे। डीजल-इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली से संचालित ये पोत भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र में 5 से 1000 मीटर तक की समुद्री गहराई में काम कर सकेंगे।

खनिज संसाधनों की खोज में बेहद उपयोगी साबित होंगे ये पोत

इस अवसर पर जीएसआई की महानिदेशक वर्षा अशोक अगलावे ने कहा कि दोनों तटीय अनुसंधान पोत देश की भूमि सीमा से आगे समुद्री क्षेत्र में खनिज संसाधनों की खोज में बेहद उपयोगी साबित होंगे।

इनके शामिल होने के बाद भारत की अपतटीय खनिज अन्वेषण क्षमता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इसे 2047 तक आत्मनिर्भर भारत और खनिज क्षेत्र में व्यापक आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप बताया।

जीआरएसई के अध्यक्ष व प्रबंधक निदेशक (सीएमडी) कमोडोर पीआर हरि ने कहा कि कील स्थापना डिजाइन और योजना से वास्तविक पोत निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सभी संबंधित पक्षों के सहयोग से जीआरएसई दोनों विशेष पोतों को तय समय पर उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ जीएसआइ को सौंपने को लेकर आश्वस्त है।

जीआरएसई वर्तमान में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र के लिए एक समुद्री अनुसंधान पोत और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की नौसेना भौतिक एवं समुद्री प्रयोगशाला के लिए एक ध्वनिक अनुसंधान पोत का निर्माण भी कर रहा है।