राज्य ब्यूरो, कोलकाता : बंगाल सरकार के साथ लगातार जारी टकराव के बीच राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने अब विधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय के नए वाइस चांसलर के रूप में प्रोफेसर बीएस महापात्रा को नियुक्त कर दिया है। राजभवन की ओर से शनिवार को एक नोटिफिकेशन जारी कर इसकी जानकारी दी गई। राज्यपाल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इसे साझा करते हुए लिखा, विधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 20 के तहत प्रदत्त शक्ति के तहत वरिष्ठ प्रोफेसर विकासचंद्र सिंघा महापात्रा को चार साल की अवधि के लिए विधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय का वाइस चांसलर नियुक्त किया गया है। 

नियुक्ति पर राज्य सरकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई

बता दें कि इससे पहले भी राज्यपाल ने एक प्रोफेसर को बर्धमान विश्वविद्यालय का वाइस चांसलर नियुक्त कर दिया था जिसके बाद राज्य सरकार के साथ उनका खासा विवाद हुआ था। राज्य सरकार के विरोध के चलते बाद में उस नियुक्ति को वापस ले लिया गया था। हालांकि राज्यपाल द्वारा विधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय में नए वाइस चांसलर की नियुक्ति पर फिलहाल राज्य सरकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। 

विधान चंद्र कृषि विवि प्रमुख कृषि विश्वविद्यालय में एक 

बता दें कि नदिया जिले के कल्याणी में स्थित विधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय देश के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों में से एक है। इधर, वाइस चांसलर के रूप में जिस वरिष्ठ प्रोफेसर महापात्रा की नियुक्ति हुई है वे फिलहाल उत्तराखंड के गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के सदस्य विज्ञान विभाग के हेड प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। बीएस महापात्रा ने कृषि में स्नातक की पढ़ाई विधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय से ही की है, और अब उसी विवि के वाइस चांसलर नियुक्त किए गए हैं। 

1991 -93 में इंग्लैंड से पोस्ट डाक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त की

जानकारी के मुताबिक, महापात्रा ने विधान चंद्र कृषि विवि से कृषि में वर्ष 1979 में बीएससी की पढ़ाई की थी। उसी साल उन्होंने पंत विवि में परास्नातक में दाखिला लिया। वर्ष 1984 में उन्हें पीएचडी की डिग्री मिली। 1985 से 2001 तक पंत विवि में सस्य विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर रहे। इस दौरान 1991 -93 में इंग्लैंड से पोस्ट डाक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त की। 

कई परियोजनाओं में काम, कई शोध पत्र प्रकाशित किए

वर्ष 2002 में विधान चंद्र कृषि विवि में प्रोफेसर पद का कार्यभार ग्रहण किया। इसके बाद वह 2008 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद कोलकाता के निदेशक बने और वह इस पद पर पाच साल तक बने रहे। वर्ष 2013 में पंत विवि के सस्य विज्ञान विभाग में प्रोफेसर बनकर आए। उत्तराखंड जैविक खेती से जुड़े कानून के सदस्य रहे और पन्त विवि में कई परियोजनाओं में काम किया। कई शोध पत्र प्रकाशित किए।

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