जागरण संवाददाता, कोलकाता। उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी के बाद मंगलवार को उत्तर व दक्षिण 24 परगना जिलों में राज्यपाल जगदीप धनखड़ की ओर से बुलाई गई बैठक में भी न तो आला प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और न ही वहां से निर्वाचित जनप्रतिनिधि। इससे क्षुब्ध राज्यपाल ने कहा कि राज्य सरकार का व्यवहार 'असंवैधानिक' है। ऐसा लग रहा है मानों बंगाल में किसी तरह की सेंसरशिप है।

दरअसल, उत्तर व दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने सोमवार शाम ही राजभवन को पत्र भेजकर सूचित कर दिया था कि जिलाधिकारियों, सांसदों और विधायकों को बैठक में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजना राज्य सरकार की अनुमति के बिना संभव नहीं है। पत्र में यह भी कहा गया था कि सभी वरिष्ठ सरकारी अधिकारी उत्तर बंगाल में होने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रशासनिक समीक्षा बैठकों के लिए 21 से 23 अक्टूबर तक वहीं रहेंगे। वहीं कुछ जनप्रतिनिधियों ने दावा किया कि उन्हें बैठक के लिए निमंत्रण ही नहीं मिला।

राज्यपाल ने इस पर कहा-'मैं जिलाधिकारियों के पत्र देखकर हैरान हूं। उन्होंने बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई है। वह भी तब, जब उन्हें चार दिन पहले इस बाबत सूचना दे दी गई थी। क्या यह प्रतिष्ठा की लड़ाई है? मीडिया सबकुछ देख रही है। आखिर वे किसके सामने अपना नंबर बढ़ाना चाहते हैं? ऐसा लगता है कि बंगाल में किसी तरह की सेंसरशिप है। राज्यपाल के साथ बैठक अथवा बातचीत के लिए भला अनुमति क्यों लेनी पड़गी? मैं संवैधानिक प्रधान होने के नाते जहां मन जा सकता हूं लेकिन जहां भी जा रहा हूं, प्रशासनिक अधिकारी बीमारी का हवाला देकर नदारद रह रहे हैं। मुझे नीचा दिखाने के लिए ही कोई नहीं आया। मुख्यमंत्री अथवा मंत्रियों के आने पर वे हाजिर होते हैं।' राज्यपाल ने आगे कहा-'सबको पता है कि रेड रोड पर हुए पूजा कानिर्ववल के दौरान चार घंटे किसकी पब्लिसिटी हुई थी।

सरकार छुट्टी पर गई है क्या?

ममता सरकार पर तंज कसते हुए राज्यपाल ने कहा-'क्या सरकार छुट्टी पर चली गई है? मुख्यमंत्री तो छुट्टी ले सकती हैं लेकिन कोई सरकार कैसे छुट्टी लेगी? क्या राज्यपाल राज्य के अधीन हैं? फिर प्रशासनिक अधिकारियों को मेरे से बात करने के लिए सरकार से अनुमति लेने की जरुरत क्यों पड़ रही है?' राज्यपाल ने मंत्रियों द्वारा उन्हें लेकर दिए गए हालिया बयान पर कहा कि मुझे जवाब देने के लिए राज्य सरकार को अलग से एक मंत्री रखना चाहिए। धनखड़ ने कहा-'यद्यपि प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि बैठक में नदारद रह रहे हैं, बावजूद इसके मैं जिलों का दौरा जारी रखूंगा और जनता से संवाद स्थापित करूंगा।' राज्यपाल ने मंगलवार को उत्तर व दक्षिण 24 परगना जिलों में बीएसएफ के अधिकारियों के साथ बातचीत की। उन्होंने बीएसएफ की बोट पर बैठकर सीमावर्ती इलाकों का भी मुआयना किया। बताया जा रहा है कि इसे लेकर वे केंद्र को रिपोर्ट सौंपेंगे।

बंगाल में चलता है ममता का संविधान : विजयवर्गीय

राज्यपाल के जिला दौरे में प्रशासनिक अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि बंगाल में देश का नहीं बल्कि ममता बनर्जी का संविधान चलता है। यही वजह है कि एक संवैधानिक प्रधान के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है। बंगाल सरकार ममता बनर्जी की सरकार है। यह सरकार संविधान का पालन नहीं करती। अगर राज्यपाल को अनुमति लेनी पड़ रही है तो इससे पता चलता है कि ममता बनर्जी का कानून, जो पश्चिम बंगाल में चलता है, वह देश का कानून नहीं है।

प्रशासनिक प्रधान देंगी राज्यपाल का जवाब : पार्थ

इस पूरे प्रकरण पर राज्य के शिक्षा मंत्री व तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा-'मैं राज्यपाल की प्रत्येक बात का जवाब देना उचित नहीं समझता। निश्चित तौर पर प्रशासनिक प्रधान होने के नाते मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तमाम घटनाक्रमों पर नजर रखी हुई हैं और वे ही राज्यपाल की बातों का जवाब देंगी। राज्यपाल कहां जा रहे हैं और क्या बोल रहे हैं, ये उनकी मर्जी है।

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Posted By: Sachin Mishra

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