राज्य ब्यूरो, कोलकाता: बंगाल में कोरोना महामारी का हर दिन नया रिकार्ड बन रहा है। कोलकाता में हर दूसरा व्यक्ति कोरोना संक्रमित निकल रहा है। ऐसे में मकर संक्रांति पर आयोजित होने वाले गंगासागर मेला को लेकर विशेषज्ञ चिंतित है। कलकत्ता हाई कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद से मेला शुरू हो चुका है और यह 16 जनवरी तक जारी रहेगा। वही कोरोना महामारी का ओमिक्रोन वैरिएंट बंगाल समेत कई प्रांतों में संक्रमण की लहर में एक नई उछाल पैदा कर दिया है। रविवार को बंगाल में 24,287 नए मामले सामने आए हैं।

कोलकाता में, जो गंगा सागर से केवल सात घंटे की दूरी पर है, सकारात्मकता दर 57.98 प्रतिशत पहुंच चुकी है, जो देश भर में दूसरी सबसे ऊंची दर है। धार्मिक समागम ऐसे समय हो रहा है, जब विशेषज्ञ इस डर से एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं कि इस आयोजन से अस्पताल में भर्तियों की संख्या बढ़ सकती है और राज्य का स्वास्थ्य ढांचा चरमरा सकता है।

कोरोना संक्रमण की तेज रफ्तार बढ़ाई चिंता

गंगा सागर मेला एक पवित्र वार्षिक तीर्थ है, जिसका आयोजन हर वर्ष मकर संक्रांति के मौके पर किया जाता है। कुंभ मेले के बाद ये देश का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक जमावड़ा है, जो बंगाल की खाड़ी में गंगा के संगम स्थल पर लगता है। श्रद्धालु वहां डुबकी लगाते हैं, जिसके बाद कपिल मुनि आश्रम में पूजा अर्चना करते हैं। पिछले वर्ष करीब एक सप्ताह में गंगासागर में तीस लाख से अधिक लोगों ने डुबकी लगाई थी। इस बार भी आंकड़ा लाखों में हो सकता है। इसे लेकर विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं।

खासकर ये देखते हुए कि पिछले साल हरिद्वार के कुंभ मेले के बाद क्या स्थिति बनी थी। चिकित्सकों से लेकर विशेषज्ञों तक यह कह रहे हैं कि कोरोना के मौजूदा हालात में लोगों को भीड़ लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, चूंकि कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है और संक्रमण के साथ हमले की दर भी काफी ऊंची है और टीका लगे हुए लोगों भी संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे में यह आयोजन बड़ी मुश्किल पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ओमिक्रान का प्रकोप किसी एक व्यक्ति के लिए मामूली हो सकता है लेकिन समुदाय के लिए ये काफी गंभीर है क्योंकि इसमें संक्रमण दर ज्यादा है और कुल नए केसों में से अगर आधे को भी अस्पताल जाने की जरूरत पड़ी, तो पूरी स्वास्थ्य चरमरा सकती है।

Edited By: Vijay Kumar