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बंगाल: गंगासागर मेले में इस बार नहीं दिखेंगी होगला पत्तों की झोपड़ियां, कारीगरों और कारोबारियों की बढ़ी चिंता

Published: Fri, 23 Oct 2026 08:05 PM (GMT+05:30)

इस बार गंगासागर मेले में पारंपरिक होगला पत्तों की झोपड़ियां शायद नहीं दिखेंगी, सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के मद्देनजर प्रशासन इनके विकल्प तलाश रहा है।

गंगासागर मेले में नहीं दिखेंगी होगला पत्तों की पारंपरिक झोपड़ियां

गंगासागर मेले में नहीं दिखेंगी होगला पत्तों की पारंपरिक झोपड़ियां

HighLights

  1. गंगासागर मेले में पारंपरिक होगला झोपड़ियों पर लग सकता विराम।

  2. सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के लिए प्रशासन तलाश रहा नए विकल्प।

  3. दशकों पुरानी परंपरा बदलने से कारीगरों में बढ़ी चिंता।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। देश के प्रमुख धार्मिक समागमों में शामिल गंगासागर मेले में इस बार बहुत कुछ बदला-बदला सा देखने को मिलेगा।

बंगाल में हुए सत्ता परिवर्तन व भाजपा के सत्ता में आने के बाद शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली सरकार अपने कार्यकाल में पहली बार आयोजित होने वाले इस मेले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले आयोजन के रूप में पेश करने की तैयारी में है।

दक्षिण 24 परगना जिले के सागरद्वीप में हर साल जनवरी में मकर संक्रांति पर लगने वाले इस मेले को भव्य बनाने की तैयारियों और सुरक्षा और सौंदर्यीकरण पर जोर के मद्देनजर इस बार एक ऐसी परंपरा पर विराम लगने की आशंका है, जो करीब पांच दशक से इसकी पहचान और व्यवस्था का हिस्सा रही है।

यह सागरद्वीप में बनाई जाने वाली होगला पत्तों की पारंपरिक झोपड़ियां (अस्थाई शिविर) हैं, जो इस बार शायद नजर न आएं। पिछले गंगासागर मेले के दौरान होगला पत्तों से तैयार अस्थायी शिविरों में आग लगने की घटना से सबक लेते हुए प्रशासन इस बार इनके इस्तेमाल को कम करने या बंद करने के विकल्प तलाश रहा है।

प्रशासन इनके स्थान पर वाटरप्रुफ टेंट और आधुनिक हैंगर जैसी संरचनाओं के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है। टिन और प्लाइवुड जैसी दूसरी सामग्रियों से अस्थाई शिविर बनाने के विकल्प पर भी विचार चल रहा है।

गंगासागर मेले की तैयारियों को लेकर दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारी कार्यालय में हाल में हुई बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में जिलाधिकारी, सुंदरबन विकास विभाग के राज्यमंत्री दीपंकर जाना और सागर के विधायक सुमंत मंडल मौजूद थे।

अग्निशमन विभाग समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों से भी सुझाव लिए गए। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

विधायक सुमंत मंडल के अनुसार, आग की घटनाओं को रोकने के साथ मेले के सौंदर्यीकरण को भी ध्यान में रखा जा रहा है। विभिन्न विभागों से मिलने वाले प्रस्तावों के आधार पर अंतिम योजना तैयार की जाएगी।

अब तक आर्डर नहीं मिलने से कारीगरों और कारोबारियों की बढ़ी चिंता

गंगासागर मेले में होगला पत्तों का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीर्थयात्रियों से लेकर पुलिसकर्मियों, पत्रकारों और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के लिए अस्थायी शिविर बनाने में होता रहा है। ये पत्ते विशेषकर पूर्व मेदिनीपुर जिले से नावों के जरिए गंगासागर लाए जाते हैं।

पहले इन्हें विशेष रसायन में डुबोकर सुखाया जाता है। होगला एक प्रकार का जलीय पौधा है, जो दलदली जमीन, आर्द्रभूमि और नदियों के किनारे उगता है। पूर्व मेदिनीपुर से गंगासागर मेले के लिए होगला की छतें भेजने की परंपरा करीब पांच दशक पुरानी है।

पूर्व मेदिनीपुर के कई गांवों के लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हैं। आमतौर पर जिला प्रशासन सितंबर से ही होगला के अस्थायी शिविरों के निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करता था। लेकिन इस बार अब तक यह प्रक्रिया शुरू नहीं होने से होगला की छतें बनाने वाले कारीगरों और कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।