'बंगाल के कोयला क्षेत्र में वर्षों से जंगलराज, केंद्र कर रहा सुधार', केंद्रीय खनन मंत्री ने ममता बनर्जी पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर राज्य के कोयला क्षेत्र को अवैध खनन माफिया के नियंत्रण में रखने का आरोप लगाया।

केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री जी किशन रेड्डी(फाइल फोटो)
HighLights
केंद्रीय मंत्री रेड्डी ने ममता सरकार पर अवैध कोयला खनन का आरोप लगाया।
कहा, राज्य का कोयला क्षेत्र वर्षों से माफिया के नियंत्रण में रहा।
केंद्र सरकार पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि के लिए सुधार कर रही है।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री जी किशन रेड्डी ने सोमवार को बंगाल की पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य का कोयला क्षेत्र वर्षों से अवैध खनन संचालकों और माफिया के नियंत्रण में रहा है।
उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार पारदर्शिता लाने, अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने और खनन से होने वाला राजस्व राज्य के सरकारी खजाने तक पहुंचाने के लिए सुधार कर रही है।
रेड्डी ने कोलकाता में एसोचैम द्वारा अंगुल एल्युमिनियम पार्क में आयोजित एक औद्योगिक रोडशो को संबोधित करते हुए कहा कि पिछली सरकारों के दौरान राज्य के कोयला क्षेत्र में जवाबदेही का अभाव रहा और यह कई वर्षों तक माफिया और अवैध खनन संचालकों के नियंत्रण में रहा। उन्होंने इस स्थिति को जंगल राज करार दिया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोल इंडिया का मुख्यालय भले ही कोलकाता में है, लेकिन इस हकीकत का अनुभव सभी ने किया है। उन्होंने कहा कि वह राज्य में कोयला और खनन क्षेत्र के विकास पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात करेंगे।
अवैध खनन से जुड़े खतरों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि बिना वैध अनुमति, सुरक्षा मानकों और नियामकीय निगरानी के खनन किया जाता था। उन्होंने कहा कि खनन की कोई अनुमति नहीं थी, फिर भी बिजली कनेक्शन का इस्तेमाल कर अवैध खनन किया जाता था। दुर्घटनाएं हुईं, लोगों की जान गई और कोई जवाबदेही नहीं थी।
बंगाल में ऐसा ‘जंगल राज’ था, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बदलने के लिए अब हम विशेष प्रयास कर रहे हैं। रेड्डी ने खनन क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पारदर्शिता पर केंद्र के जोर से अवैध खनन नेटवर्क पर कार्रवाई करने और राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि करने में मदद मिल रही है।
उन्होंने कहा कि पहले कोयले से होने वाला राजस्व सरकारी खातों में नहीं जाता था, बल्कि कहीं और चला जाता था। आज पारदर्शी प्रक्रियाओं और कड़ी जवाबदेही के जरिए कई अवैध संचालक पीछे हट गए हैं और इस क्षेत्र से राज्य का राजस्व बढ़ेगा।
