इम्तियाज अहमद अंसारी, हावड़ा :

त्योहार के इस मौसम में राज्य में फूलों की मांग खूब रहती है, जिससे फूलों का बाजार आम दिनों के मुकाबले तेज रहता है, लेकिन इस साल फूलों की मांग में कमी होने के कारण फूल का कारोबार जहां एक ओर नरम है, वहीं इसका असर फूल किसानों की आय पर भी पड़ा है। ग्रामीण हावड़ा का बागनान व आसपास के इलाके फूल की खेती के लिए विख्यात हैं। बागनान के बाकुड़दह, कमारदह, चांदगड़िया, बुलगरिया, खनजादापुर, नाउपाला, विरामपुर, मतिमाला, पानीत्रास, जलपाई व नाचक इलाकों में फूलों की खूब खेती होती है। इनमें गुलाब, जवा, गेंदा. चंद्रमुखी व अन्य फूल शामिल हैं। बागनान के ब्लाक एक और दो के तहत लगभग एक हजार एकड़ से ज्यादा जमीन पर विभिन्न प्रकार के फूलों की खेती होती है। हजारों किसान व उनके परिवार फूलों की खेती करते हैं। खेती से होने वाली आय पर किसान और उनके परिवार की आजीविका चलती है।

इस साल फूलों की खेती की लागत बढ़ने के कारण वैसे ही किसानों की आय प्रभावित हुई है। बीते माह हुई अतिरिक्त बारिश के कारण फूल की खेती को भी नुकसान हुआ है। इस साल किसानों को उम्मीद थी कि अतिरिक्त बारिश से फसल को हुए नुकसान की भरपाई त्योहारी मौसम में फूलों की अच्छी कीमत से हो जाएगी लेकिन बाजार में फूलों की कमजोर मांग के कारण परेशानी यहां भी किसानों का पीछा नहीं छोड़ रही।

पड़ोसी राज्य बिहार में बाढ़ की स्थिति के कारण वहां भी फूलों की मांग कमजोर है। मजबूरन कम कीमत पर फूल बेचने को किसान मजबूर हैं। ऐसे में खेती की लागत वसूलने में भी किसानों के पसीने छूट रहे हैं।

70 वर्षीय फूल किसान बुद्धदेव भौमिक ने बताया कि पूजा के इस त्योहारी समय में बाजार में फूलों की अच्छी मांग रहती है। जवा, गेंदा, चंद्रमुखी व अन्य कई किस्मों के फूलों की मांग तेज रहती है। उत्पादित फसल को पूर्व मेदिनीपुर जिले के कोलाघाट और हावड़ा के जगन्नाथ घाट स्थित फूल मंडी में किसान बेचते हैं। बीते साल 160 रुपये हजार जवा फूल की कीमत थी, जो इस साल घटकर 80 रुपये हजार पर आ गई है। वहीं गेंदा फूल की कीमत में भी गिरावट आई है। पिछले साल लाल गेंदा फूल की माला (प्रति बंडल) 300 रुपये और पीला गेंदा फूल की माला (प्रति बंडल) 500 रुपये बिकी है जबकि इस साल गेंदा फूल की कीमत 200-250 रुपये रही है। वहीं चंद्रमुखी फूल प्रति किलो 150 से 300 रुपये ही बिका है।

किसानों का कहना है कि राज्य में कम मांग की भरपाई बिहार व पड़ोस के राज्यों में उत्पादित फसल को भेजकर हो जाती थी लेकिन इस बार बिहार में बाढ़ आने के कारण वहां भी मांग मध्यम है। किसान पुलक धाड़ा ने कहा कि इस बार तो ऐसा हुआ है कि उत्पादित फूलों को सड़क पर फेंकने की नौबत आन पड़ी है। महालया के बाद बाजार में फूलों की मांग जोर पकड़ती थी, जो दुर्गा पूजा की नवमी तक बनी रहती थी। इस समय फूल की खेती करने वाले किसानों को अच्छी कीमतें मिल जाती थी, लेकिन इस साल ऐसा नहीं है।

इन सबके बीच किसानों को उम्मीद है कि सामने काली पूजा है। इस दौरान जवा समेत अन्य फूलों की अच्छी मांग जोर पकड़ेगी। इससे दुर्गा पूजा के दौरान हुए घाटे की कुछ हद तक भरपाई मुमकिन हो पाएगी।

Posted By: Jagran

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