कोलकाता, जागरण संवाददाता। अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में शोध कर रहे कोलकाता के एक शोधार्थी ने कैंसर और बड़े ट्यूमर से निपटने वाली बैक्टीरिया का पता लगाया है, जिसे एंटी ट्यूमर कहा जा रहा है। 

विश्वविद्यालय की शोध पत्रिका नेचर मेडीसिन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैक्टीरिया शरीर में जाकर इंसानों के रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। साथ ही कैंसर समेत बड़े ट्यूमर से निपटने में सहायक होता है। इस शोधार्थी का नाम श्रेयान चौधरी है। उन्होंने ई-कोली नाम की बैक्टीरिया ढूंढ़ी है, जिसे एंटी-ट्यूमर कहा जा रहा है। अभी उनके लैब ने इसे बस प्रयोगों तक ही सीमित रखा है। हालांकि इसके इस्तेमाल से एक लीम्फोमा नाम की बीमारी को दूर किया जा चुका है।

बताया गया है कि इसमें कुछ तरह के कैंसर के इलाज की क्षमता है। श्रेयान चौधरी का जन्म कोलकाता में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई सेंट जेम्स स्कूल से की है, लेकिन उन्होंने स्नातक अमेरिका से किया है। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर टाल डानिनो और कोलंबिया विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर निकोलस ऑर्फिया की देखरेख में पीएचडी शुरू किया।

उनका विषय लीफोमा के इलाज और बैक्टीरिया पर शोध था। आमतौर पर स्तन कैंसर, स्किन कैंसर भी बैक्टीरिया के कारण होते हैं। इतना ही नहीं आमतौर पर इलाज के बाद कैंसर के बैक्टरिया किसी भी इंसान में 80 प्रतिशत तक जिंदा होते हैं और दोबारा हमले की कोशिश करते हैं।

लेकिन अगर ट्यूमर का सही इलाज हो रहा है तो प्लैक्बो बैक्टीरिया जैसे खतरनाक वायरस भी 30 दिन के भीतर दम तोड़ देते हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी से जुड़े कई वैज्ञानिक इन बैक्टीरिया के ऊपर लगातार काम कर रहे हैं। 

Posted By: Preeti jha

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