कोलकाता, राज्य ब्यूरो। अब कोलकाता से बैठे भूवैज्ञानिक पूर्वोत्तर के लोगों को भी जमीन के अंदर होने वाले परिवर्तन से सावधान कर सकेंगे। दुर्गापूजा के आसपास बंगाल भी भूकंप की आशंका को देखते हुए जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) ने पश्चिम बंगाल के कूचबिहार और झारखंड के रांची में नए जीपीएस मैपिंग स्टेशन बनाने का निर्णय लिया है। इन दोनों स्टेशनों पर बहुत जल्द काम भी शुरु कर दिया जाएगा। पूर्वोत्तर भारत में समय-समय पर आने वाले भूकंप से पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, नगालैंड, उत्तर प्रदेश, सिक्किम, उतराखंड, नेपाल को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि कोलकाता, भुवनेश्वर और पटना से संचालित ग्लोबल पोजशनिंग सिस्टम (जीपीएस) से पूर्वी भारत के भूलोक के पल-पल के डेटा और चित्र कोलकाता में केंद्रीय सर्वरों में अपलोड और एकत्रित हो रहे हैं। 

 बंगाल में आने वाले भूकंप से लोगों के दिलों में पैदा हुआ डर 

इन स्टेशनों से भूकंप की संभावना वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर भूकंपीय गति का निर्धारण भी किया जा रहा है और सटीकता के साथ चित्र भी लिए जा रहे हैं और उसे प्रकाशित किया जा रहा है। लेकिन कूचबिहार और रांची में स्थापित होने वाले इन दोनों नए स्टेशनों से भूकंपीय गति का निर्धारण करना और आसान हो जाएगा। 

 अक्टूबर में बंगाल में भूकंप की आशंका

-चक्रवात एम्फन से हुई एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की तबाही और कोरोना संक्रमण से बिगड़ी सामाजिक और आर्थिक स्थिति से बंगाल अभी तक उबर नहीं पाया है। इस बीच बंगाल में भूकंप आने की आशंका ने लोगों के दिलों में डर पैदा कर दिया है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि इस साल अक्टूबर महीने के अंतिम सप्ताह में होने वाली दुर्गापूजा के आसपास बंगाल भी भूकंप के बड़े झटके हो सकते हैं जिससे भयंकर जान-माल की हानि हो सकती है। हालांकि डॉ संदीप कुमार सोम, डीडीजी, जिओ-डायनेमिक्स डिवीजन, जीएसआई के मुताबिक भूकंप के विशिष्ट समय के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है। इस मुद्दे पर दुनिया भर में अनुसंधान चल रहा है; इसलिए यह कहना मुश्किल है कि दुर्गापूजा से पहले बंगाल में भूकंप होगा या नहीं। लेकिन यह पता जरूर लगाया जा सकता है कि कौन से क्षेत्र भूकंप के प्रति संवेदनशील या अतिसंवेदनशील हैं। जीएसआई के पास फिलहाल 30 जीपीएस स्टेशन हैं जहां स्टैपिंग मैपिंग का निर्माण किया जा रहा है। यह एक सतत प्रक्रिया है, इसलिए हम अभी निष्कर्षों के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह पाएंगे। कोई भी भूकंप के लिए एक विशिष्ट समय नहीं बता सकता है। हम केवल संभावित क्षेत्रों का पता लगाने की कोशिश करते हैं, जहां यह हो सकता है। यदि कोई बड़ा भूकंप आता है, तो यह निश्चित रूप से पर्यावरण को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा, लेकिन पर्यावरण परिवर्तन से भूकंप का होना संदिग्ध हैं।

  क्या है जीपीएस मैपिंग का कार्य

  -ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) स्टेशन का मुख्य कार्य भूकंपीय खतरनाक क्षेत्रों की पहचान करना और मानचित्रण कर गतिविधियों को प्रकाशित करना है। जिसके आधार पर लोगों को सजग किया जा सकता है। अब तक देश में 30 जीपीएस स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। कोलकाता, तिरुवनंतपुरम, जयपुर, पुणे, देहरादून, चेन्नई, जबलपुर, भुवनेश्वर, पटना, रायपुर, भोपाल, चंडीगढ़, गांधीनगर विशाखापत्तनम, अगरतला, ईटानगर, मंगन, जम्मू, लखनऊ, नागपुर, शिलॉन्ग और लिटिल अंडमान में जीपीएस स्टेशन स्थित हैं। जानकारी के मुताबिक, नए 13 स्टेशन आइजोल, फरीदाबाद, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, कूचबिहार, ज़ावर, उत्तर अंडमान, मध्य अंडमान, दक्षिण अंडमान, रांची, मंगलौर, इम्फाल और चित्रदुर्ग में स्थापित होंगे।

Posted By: Babita kashyap

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