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जागरण संवाददाता, कोलकाता : 'देश के इतिहास, संस्कृति, नीति और आदर्श में असहिष्णुता के लिए कोई स्थान नहीं है। हम झगड़ालू हो सकते हैं, आत्मकेंद्रित हो सकते है, तार्किक हो सकते हैं, लेकिन असहिष्णु नहीं'। उक्त बातें पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को आगरपाड़ा स्थित स्वामी विवेकानंद सभागृह का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में कही। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से प्राप्त पांच करोड़ की मदद राशि से इस सभागृह का निर्माण किया गया है। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने आगे कहा कि विश्वविद्यालयों में सभी प्रकार के मतों, मुद्दों व विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। यहां असहिष्णुता के लिए कोई स्थान नहीं है। अगर हमारी सोच में असहिष्णुता घर कर जाती ह तो यह हमारे देश व समाज के लिए घातक होगा। उन्होंने युवाओं से स्वामीजी के विचारों को आत्मसात करने की अपील की। रामकृष्ण विवेकानंद मिशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार आगरपाड़ा स्थापित सभागृह का इस्तेमाल सामाजिक विकास के साथ ही स्वामीजी के आदर्शो के प्रचार-प्रसार के लिए किया जाएगा।

Posted By: Jagran

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