कोलकाता, राज्य ब्यूरो। बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनी ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) से अवैध कोयला खनन और घोटाला के मामले में राज्य में 12 जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। सूत्रों ने बताया कि ईडी अधिकारियों की एक बड़ी टीम ने व्यवसायी गणेश बागडिय़ा सहित संजय सिंह और अमित सिंह के कार्यालयों और आवास पर तलाशी अभियान चलाया। बताया गया कि ईडी के करीब 100 अधिकारियों की अलग-अलग टीमों ने सुबह से ही कोलकाता के लेकटाउन, गरिया, उत्तर 24 परगना, हुगली जिले के कोननगर, आसनसोल, दुर्गापुर व बद्र्धमान में कोयले के अवैध कारोबार के सिलसिले में सोमवार सुबह से ही छापेमारी की।

अधिकारियों के साथ सीआरपीएफ के जवान भी थे। सूत्रों ने बताया कि ईडी ने व्यापारी गणेश बागडिय़ा के ठिकानों के अलावा हुगली के कोन्नगर स्थित कन्हाईपुर में सिंह ब्रदर्स के ठिकानों पर तलाशी ली। माना जा रहा है कि बगडिय़ा और सिंह ब्रदर्स के तार अवैध कोयला तस्करी के रैकेट का कथित प्रमुख सरगना (किंगपिन) अनूप माजी उर्फ लाला से जुड़े रहे हैं, जो कथित तौर पर तृणमूल नेता विनय मिश्रा के साथ मिलकर सिंडिकेट चला रहा था। आरोप है कि इन लोगों के तार गो तस्करी का कथित सरगना इनामुल हक के साथ भी जुड़े रहे हैं।

बागडिय़ा और सिंह ब्रदर्स पर कोयला व गो तस्करी के रुपये को मार्केट में खपाने में इनामुल हक की कथित तौर पर मदद करने का भी आरोप है। बताया जा रहा है कि सोमवार को जो छापेमारी की गई उनमें मध्य कोलकाता के बेंटिक स्ट्रीट स्थित एक ही मकान के चौथे व सातवें तल्ला पर गो तस्करी मामले के प्रमुख आरोपी इनामुल हक के दो ठिकाने भी शामिल है। इससे पहले पिछले 28 नवंबर को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) की भ्रष्टाचार रोधी शाखा ने बंगाल, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में कोयला तस्करी के रैकेट के संबंध में 45 स्थानों पर छापे मारे थे। सीबीआइ ने पश्चिम बद्र्धमान जिले के आसनसोल, दुर्गापुर और रानीगंज में माजी के कार्यालयों और घरों पर छापेमारी की थी। माजी के सहयोगियों के कुछ घरों में भी तलाशी अभियान चलाया था।

किन-किन धाराओं में दर्ज है मामला

ईडी के सूत्रों ने बताया कि कोयला एवं गो तस्करी मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लाउंडरिंग एक्ट के तहत मामला दायर कर छापेमारी शुरू की गई है। छापेमारी का प्रमुख मकसद यह पता लगाना है कि कोयला तस्करी और गो तस्करी से मिलने वाली मोटी रकम कहां जाती है? इस रैकेट के तार किन-किन लोगों से जुड़े हैं।

सूत्रों के मुताबिक, छापेमारी में कुछ ऐसे सबूत हाथ लगे हैं, जिससे पता चलता है कि हवाला कारोबारियों के माध्यम से तस्करी के रुपये का मोटा हिस्सा विदेश भेजा जाता था। इससे जुड़े सबूत हाथ लगने के बाद अब ईडी के अधिकारियों ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) एक्ट को भी इस मामले से जोडऩे का फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को सभी ठिकानों में की गई छापामारी में जो-जो सबूत हाथ लगे हैं, उसकी गहराई से जांच करने के बाद वे आगे की कार्रवाई शुरू करेंगे।

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