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820 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में ईडी का एक्शन, कोलकाता में 12 ठिकानों पर तलाशी

Published: Wed, 30 Sep 2026 09:43 PM (GMT+05:30)

ईडी ने कोलकाता में 820 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण धोखाधड़ी और दिवालियापन संहिता के कथित दुरुपयोग से जुड़े धनशोधन मामले में 12 ठिकानों पर तलाशी ली।

बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में ईडी का एक्शन।

बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में ईडी का एक्शन।

HighLights

  1. ईडी ने कोलकाता में 820 करोड़ रुपये बैंक धोखाधड़ी मामले में तलाशी ली।

  2. टायल समूह पर उत्पादन क्षमता और स्टॉक में हेरफेर का आरोप।

  3. धनशोधन और दिवालियापन संहिता के दुरुपयोग की भी जांच।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। ईडी ने बुधवार को 820 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण धोखाधड़ी और उसके बाद दिवालिया एवं दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के कथित दुरुपयोग से जुड़े धनशोधन मामले में कोलकाता में 12 ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई कोलकाता स्थित टायल समूह के खिलाफ की गई है।

ईडी अधिकारियों के अनुसार समूह ने उत्पादन क्षमता और मशीनरी को लेकर कथित तौर पर गलत घोषणाएं कीं, स्टॉक संबंधी विवरणों में हेरफेर किया और बंधक मशीनरी को कथित रूप से बिना अनुमति बेच दिया।

एजेंसी का आरोप है कि ऋण की राशि को प्रवर्तकों के नियंत्रण वाली शेल कंपनियों के जरिये कई स्तरों पर घुमाया गया और रियल एस्टेट संपत्तियों में लगाया गया। इसमें नागपुर का एम्प्रेस माल भी शामिल है, जिसे ईडी ने मई 2019 में धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया था।

आईबीसी प्रक्रिया के दुरुपयोग का आरोप

ईडी के अनुसार इसके बाद टायल समूह से जुड़ी संस्थाओं को कथित वित्तीय लेनदार दिखाकर केएसएल एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ आईबीसी के तहत कारपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू कराई गई।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि संबंधित समाधान पेशेवरों ने प्रवर्तकों से जुड़ी शेल कंपनियों के ब्याज बढ़ाकर पेश किए गए अप्रमाणित दावों को पर्याप्त सत्यापन के बिना स्वीकार किया।

ईडी का यह भी आरोप है कि कुछ आवेदनों के जरिये संपत्तियों पर उसकी कार्रवाई को हटाने की कोशिश की गई और अदालतों के समक्ष अहम तथ्यों को छिपाया गया। अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने समाधान पेशेवरों के कामकाज पर प्रतिकूल टिप्पणी करते हुए उन्हें हटाया था।