जागरण संवाददाता, कोलकाता : शुक्रवार सुबह आठ बजे साल्टलेक के सेक्टर-5 स्टेशन से मोटरमैन श्यामल चौधरी और साल्टलेक स्टेडियम से मोटरमैन मनोज गुप्ता जब अत्याधुनिक मेट्रो रैक में आम लोगों के साथ निकले तो उनकी भावनाओं को कोई अगर समझ सकता था तो वे थे तपन कुमार नाथ व सुजय शील।

आज से ठीक 35 साल, 3 महीने और 20 दिन पहले 24 सितंबर, 1984 को कोलकाता में पहली बार मेट्रो रेल धर्मतल्ला से भवानीपुर के लिए निकली थी। उस मेट्रो के ड्राइवर थे तपन कुमार नाथ और सुजय शील थे। तपन कुमार नाथ और सुजय शील को इतिहास रचने का गुमान था तो श्यामल चौधरी और मनोज गुप्ता को इतिहास फिर से दोहराने का गर्व।

स्वचालित हैं मेट्रो रैक

ईस्ट-वेस्ट मेट्रो परियोजना में चलने वाले मेट्रो रैक अत्याधुनिक और स्वचालित हैं लेकिन आरंभिक रूप से इसे मोटरमैन के साथ चलाया जा रहा है ताकि तकनीकी खामी आने पर इसे तुरंत नियंत्रित किया जा सके। बकौल मोटर मैन मनोज, रैक इतने अत्याधुनिक हैं कि इनके संचालन के प्रत्येक हिस्से का 100 फीसद प्रदर्शन आवश्यक है। यदि कहीं भी थोड़ी सी चूक होती है तो स्टेशन और रैक की ऐसी संरचना है कि बड़ी तकनीकी समस्या खड़ी हो सकती है। मसलन, प्लेटफॉर्म पर रैक को रोकने में तय स्थान से एक-दो इंच भी इधर-उधर होता है प्लेटफार्म पर लगे पारदर्शी डिवाइडर किसी को रैक पर चढ़ने या उतरने ही नहीं देंगे।

पहले दिन मेट्रो सेवा का संचालन 20 मिनट के अंतराल पर हुआ, हालांकि पुरानी मेट्रो सेवा में यह अंतराल मात्र सात मिनट का है। वेलेंटाइंस डे पर शुरू हुई सेवा के मद्देनजर शुक्रवार को पहले 50 यात्रियों का स्वागत गुलाब से किया गया। इस दौरान इस उद्घाटन सेवा की गवाह बनने एक ऐसी महिला यात्री भी पहुंची, जो 35 साल पहले शुरू हुई धर्मतल्ला-भवानीपुर मेट्रो सेवा के उद्घाटन की भी गवाह रह चुकी हैं।

Posted By: Jagran

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