राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पूर्व रेलवे अतिरिक्त कमाई के लिए हावड़ा शाखा के स्टेशनों के नाम की को-ब्रांडिंग करने जा रहा है। को-ब्रांडिंग का मतलब है कि स्टेशन के नाम के साथ कारपोरेट ब्रांड का नाम जोड़ा जाएगा। पूर्व रेलवे के सूत्रों के अनुसार को-ब्रांडिंग का मकसद गैर-किराए वाला रेवेन्यू बढ़ाना है। हालांकि स्टेशन के नाम के साथ ब्रांड के नाम को जोड़े जाने के बाद भी टाइमटेबल, वेबसाइट, टिकट घोषणाओं और रूट मैप में स्टेशन का असल नाम ही रहेगा। इसके मद्देनजर आने वाले दिनों में यात्रियों को रेलवे स्टेशनों पर कमर्शियल ब्रांडिंग देखने को मिल सकती है।

स्टेशन के नाम के साथ होगा ब्रांड का नाम

पूर्व रेलवे के सूत्रों के अनुसार विज्ञापन देने वाली कंपनी की ब्रांडिंग स्टेशन परिसर में उस हर जगह पर होगी, जहां-जहां स्टेशन का नाम लिखा है। ये नाम स्टेशन के नाम से पहले भी जुड़ सकता है और बाद में भी। ऐसा कोलकाता मेट्रो रेलवे पिछले कई सालों से कर रहा है जबकि टाइमटेबल, टिकट घोषणाओं और रूट मैप में स्टेशन का असल नाम ही है।

इन स्टेशनों पर नहीं होगी को-ब्रांडिंग

खास बात ये है कि पूर्व रेलवे हेरिटेज बिल्डिंग या स्टेशनों के नाम के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करेगा। या ऐसे स्टेशन जिनके नाम किसी लोकप्रिय हस्ती के नाम पर रखे गए हैं, उन स्टेशनों पर को-ब्रांडिंग नहीं की जाएगी। विज्ञापन देने वाली कंपनी की ब्रांडिंग स्टेशन परिसर में हर उस जगह पर होगी, जहां-जहां स्टेशन का नाम लिखा है। हालांकि को-ब्रांडिंग के वक्त ये जरूर ध्यान रखा जाएगा कि कोई राजनीतिक, धार्मिक, अल्कोहल या तंबाकू बेचने वाली कंपनी का विज्ञापन न हो। को-ब्रांडिंग में किसी व्यक्ति के नाम का इस्तेमाल भी नहीं किया जाएगा। इस ब्रांडिंग के बदले पूर्व रेलवे कंपनियों से अच्छा मुनाफा कमाएगा। स्टेशन को ब्रांडिंग के लिए एक बार में एक से लेकर तीन साल के लिए आवंटित किया जाएगा। इस दौरान विज्ञापन पैनल, होर्डिंग के रख रखाव की जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी। 

Edited By: Priti Jha