राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के नदिया जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा में तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 54वीं वाहिनी की पहल से एक बार फिर पड़ोसी देश बांगलादेश में रहने वाली एक बेटी को भारत में अपनी मृत मां का अंतिम दर्शन नसीब हुआ। परिवार के अनुरोध पर बीएसएफ ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास जीरो लाइन पर अंतिम दर्शन कराने की व्यवस्था की।

अधिकारियों ने बताया कि यह घटना नदिया जिले के सीमावर्ती गांव मटियारी (बागनपारा) की है, जब यहां के रहने वाले तोता मंडल ने 54वीं वाहिनी की सीमा चौकी मटियारी के कंपनी कमांडर को बताया कि उसकी माता हवा मंडल का 21 मई की सुबह करीब 10 बजे देहांत हो गया है। उसकी बहन माबिया बीबी अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा के पार बांग्लादेश के गांव माधोपखाली, जिला- चुआडंगा में रहती है, जो सीमा से करीब एक किलोमीटर दूरी पर ही है। उन्होंने गुजारिश की कि अगर बीएसएफ मदद करदे तो उनकी बहन को अपनी मां के अंतिम दर्शन नसीब हो जाएंगे। इसके बाद कंपनी कमांडर ने उनकी बात सुनकर मानवीयता और भावनात्मक पहलू को ध्यान में रखते हुए बिना कोई देर किए इस संबंध में तुरंत अपने समकक्ष बार्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के अधिकारियों से संपर्क किया।

बीएसएफ के अनुरोध पर बीजीबी ने भी तुरंत बढ़ाया कदम

बीएसएफ के अनुरोध के बाद बीजीबी ने भी मानवीय दृष्टिकोण को देखते हुए तुरंत कदम आगे बढ़ाया। लिहाजा दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों ने आपसी सहयोग के मद्देनजर मानवता को सर्वोपरि रखते हुए बांग्लादेश में रहने वाली बेटी को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास जीरो लाइन पर दोपहर में ही उनकी माता के अंतिम दर्शन करवाने की व्यवस्था की। इस तरह बेटी को अपनी माता के अंतिम दर्शन संभव हुए।

बीएसएफ का जताया आभार

वहीं, अंतिम दर्शन के उपरांत मृतक की बेटी ने सीमा सुरक्षा बल की इस पहल के लिए आभार जताया और कहा कि आप लोगों की मानवीयता के चलते हमें अपनी माता के अंतिम दर्शन नसीब हुए हैं।

बीएसएफ सदैव सामाजिक व मानवीय मूल्यों का रखती है ख्याल : कमांडेंट देशराज सिंह

इधर, इस प्रकरण पर 54वीं वाहिनी के कमांडिंग आफिसर देशराज सिंह ने बताया कि बीएसएफ के जवान सीमा पर दिन- रात बिना पलक झपकाए तैनात रहते हैं और देश की सुरक्षा के साथ ही सीमा वासियों के सुख- दुख समेत उनके धार्मिक और सामाजिक मूल्यों का भी ख्याल रखते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीमा सुरक्षा बल गलत मंशा रखने वालों के खिलाफ है, लेकिन जब बात इंसानियत व मानवीय मूल्यों की आती है तो वह सदैव तत्पर रहती है। 

Edited By: Priti Jha