बंगाल: जेल की सलाखों के पीछे भी दुर्गापूजा की रौनक, प्रेसिडेंसी में वंदे मातरम की थीम
बंगाल की जेलों में दुर्गा पूजा की धूम है, जहां कैदी और जेलकर्मी मिलकर उत्सव मना रहे हैं। कोलकाता की ...और पढ़ें

(यह तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है)
HighLights
बंगाल की जेलों में कैदी-जेलकर्मी मिलकर मना रहे दुर्गा पूजा।
प्रेसिडेंसी जेल में 'वंदे मातरम' थीम पर सजा मंडप।
कैदियों के लिए विशेष भोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में दुर्गापूजा की रौनक जेल की ऊंची दीवारों और सलाखों के पीछे भी पहुंच गई है। राज्य के विभिन्न केंद्रीय और जिला संशोधनागारों में कैदी और जेलकर्मी मिलकर दुर्गापूजा में जुटे हैं।
कहीं देशभक्ति की थीम पर मंडप सजाया गया है, तो कहीं ग्रामीण बंगाल की झलक दिखाई दे रही है। पूजा के दौरान कैदियों के लिए विशेष भोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी व्यवस्था की गई है।
कोलकाता के प्रेसिडेंसी संशोधनागार में इस बार वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘वंदे मातरम और राष्ट्रवाद’ की थीम पर दुर्गापूजा आयोजित की जा रही है। जेल प्रशासन के अनुसार, कैदियों की सांस्कृतिक टीम ने अपने हाथों से पूजा मंडप तैयार किया है।
मंडप के आसपास लगाए गए फ्लेक्स के माध्यम से ब्रिटिश शासन के दौरान प्रेसिडेंसी जेल में बंद रहे स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों की कहानियों को प्रदर्शित किया गया है।
बर्द्धमान केंद्रीय संशोधनागार में ग्रामीण बंगाल की थीम पर सजाया गया मंडप
बर्द्धमान केंद्रीय संशोधनागार में ग्रामीण बंगाल की थीम पर मंडप सजाया गया है। इसमें सुनील नाम के एक कैदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उसे पहले फांसी की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में माफ कर दिया गया। फिलहाल वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। मंडप सजाने में उत्पल नाम के एक अन्य कैदी ने भी सहयोग किया है।
दुर्गापूजा के दौरान कैदियों को जेल की रोजमर्रा की दिनचर्या से कुछ राहत भी मिलती है। जेल प्रशासन के मुताबिक, शाम को मंडप में बैठने, आपस में बातचीत करने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए कैदियों को कुछ अतिरिक्त समय दिया जाता है। इसके साथ ही उनके भोजन के मेन्यू में भी बदलाव किया जाता है।
दमदम से आसनसोल तक पूजा और खास भोजन की तैयारी
दमदम केंद्रीय संशोधनागार की दुर्गापूजा की एक अलग पहचान है। यहां कई वर्षों से जेल के मुख्य द्वार के बाहर पूजा आयोजित की जाती है, जहां आम लोग भी दर्शन कर सकते हैं। इस पूजा के मंडप की सजावट और स्वयंसेवक के रूप में विशेष पैरोल पर रिहा कैदी सहयोग करते हैं। इस वर्ष भी यहां आकर्षक मंडप तैयार किया गया है।
आसनसोल संशोधनागार में इस बार दूसरी बार दुर्गापूजा आयोजित हो रही है। यहां कैदी और जेलकर्मी संयुक्त रूप से पूजा कर रहे हैं। हालांकि मंडप की सजावट में कोई विशेष नवीनता नहीं है, लेकिन भोजन को लेकर खास तैयारी की गई है। अष्टमी को खिचड़ी और लाबड़ा, नवमी को बकरे के मांस की सब्जी तथा दशमी को फ्राइड राइस और चिली चिकन परोसा जाएगा। भोजन के अंत में मिठाई भी मिलेगी।
हावड़ा जिला संशोधनागार में भी पूजा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं कैदी
हावड़ा जिला संशोधनागार में भी कैदी मंडप सजाने से लेकर पूजा की अन्य तैयारियों तक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वहां कैदियों के बीच कोई पुरोहित नहीं मिलने के कारण बाहर से पुजारी बुलाया जाएगा।
जेल प्रशासन के अनुसार, केंद्रीय संशोधनागारों में बड़े स्तर पर दुर्गापूजा आयोजित होती है, जबकि जिला संशोधनागारों में आयोजन अपेक्षाकृत छोटा रहता है।
अधिकांश उप-संशोधनागारों में पूजा नहीं होती, हालांकि कल्याणी उप-संशोधनागार में पिछले पांच वर्षों से दुर्गापूजा आयोजित की जा रही है। जहां पूजा नहीं होती, वहां भी कैदियों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था की जाती है।
