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बंगाल:दमदम पार्क के पंडाल में जीवंत होगी ‘पुतुल नाच’ की मृतप्राय दुनिया, 75वें वर्ष में ‘पंचालिका’ थीम से मिलेगा लोककला के संरक्षण का संदेश

Published: Thu, 01 Oct 2026 10:38 PM (IST)

दमदम पार्क सार्वजनीन अपनी 75वीं दुर्गा पूजा में 'पंचालिका' थीम के जरिए लुप्त होती पुतुल नाच (कठपुतली नृत्य) कला को पुनर्जीवित कर रहा है।

दुर्गा पूजा में जीवंत होगा बंगाल का पारंपरिक पुतुल नाच

दुर्गा पूजा में जीवंत होगा बंगाल का पारंपरिक पुतुल नाच

HighLights

  1. दमदम पार्क सार्वजनीन 75वीं दुर्गा पूजा में पुतुल नाच थीम।

  2. 'पंचालिका' थीम से लुप्त होती लोक कला को पुनर्जीवित करने का प्रयास।

  3. पंडाल में दर्शकों के लिए पुतुल नाच के लाइव शो आयोजित होंगे।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल की समृद्ध लोक परंपराओं में गांव-गांव मनोरंजन का सशक्त माध्यम रहा पुतुल नाच (कठपुतली नृत्य) धीरे-धीरे लोगों की स्मृतियों में सिमटता जा रहा है। नई पीढ़ी इस पारंपरिक कला से दूर होती जा रही है। इसी लुप्त होती लोक कला को फिर लोगों के बीच लाने की पहल कर रही है दमदम पार्क सार्वजनीन।

अपने 75वें वर्ष में पूजा समिति ‘पंचालिका’ (कठपुतलियों के माध्यम से कथा कहने की प्राचीन लोक परंपरा) थीम के जरिये पुतुल नाच की दुनिया को जीवंत करने जा रही है। दमदम पार्क सार्वजनीन के संयुक्त सचिव मलय दे ने बताया-‘पुतुल नाच भारत की प्राचीन लोक प्रदर्शन परंपराओं में से एक है।

कभी बंगाल के गांवों और कसबों में पुतुल नाच करने वाले कलाकारों की टोलियां घूमती थीं। कठपुतलियों के माध्यम से लोककथाएं, सामाजिक घटनाएं व जीवन के विभिन्न रंग दर्शकों तक पहुंचाए जाते थे। समय के साथ मनोरंजन के नए साधनों के बढ़ते प्रभाव के बीच यह परंपरा कमजोर होती गई। हमारी थीम इसके संरक्षण की दिशा में एक प्रयास है।’

पंडाल में होंगे पुतुल नाच के लाइव शो

मलय दे ने आगे बताया, पंडाल में केवल पुतुल नाच की झलक नहीं दिखाई जाएगी, बल्कि पूजा दर्शनार्थियों को इसका लाइव अनुभव भी कराया जाएगा। हमारे पंडाल में नियमित अंतराल पर पांच से 10 मिनट के पुतुल नाच के लाइव शो होंगे। इसके लिए बंगाल के मेदिनीपुर से पुतुल नाच दिखाने वाले कलाकार आएंगे। हमारा उद्देश्य नई पीढ़ी को बंगाल की इस समृद्ध लोक कला से परिचित कराना है। आज बहुत से बच्चे और युवा पुतुल नाच के बारे में जानते ही नहीं हैं।

पुतुल नाच के माध्यम से मनोरंजन के साथ लोक संस्कृति और परंपरा भी अगली पीढ़ी तक पहुंचेगी। इस अभिनव थीम को तापस दत्त मूर्त रूप दे रहे हैं। प्रतिमा का निर्माण कलाकार सनातन डिंडा कर रहे हैं।