कोलकाता दुर्गा पूजा 2026: दमदम तरुण दल का 49वां वर्ष, पूजा पंडाल में जुड़ाव की ताकत
दमदम तरुण दल अपनी 49वीं दुर्गा पूजा में 'जोट' (जुड़ाव) थीम के माध्यम से सामूहिक शक्ति और सृजन की कहानी ...और पढ़ें

दमदम तरुण दल का निर्माणाधीन पूजा पंडाल (फोटो सौजन्य:पूजा कमेटी)
HighLights
दमदम तरुण दल की 49वीं दुर्गा पूजा की थीम 'जोट' (जुड़ाव)।
थीम सामूहिक शक्ति, सृजन और संबंधों के महत्व को उजागर करेगी।
कलाकार पूर्णेंदु दे इस अनूठी 'जोट' अवधारणा को आकार दे रहे हैं।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। सृष्टि की हर बड़ी रचना के पीछे किसी न किसी जुड़ाव की कहानी है। अणुओं के मेल से जीवन का आधार बना, परिवारों के जुड़ने से समाज बना और अलग-अलग शक्तियों के एक होने से देवी दुर्गा का प्राकट्य हुआ। जोड़ सिर्फ दो चीजों का मिलन नहीं, बल्कि सृजन, संबंध और सामूहिक शक्ति की कहानी है।
दमदम तरुण दल अपने 49 वर्ष की पूजा पंडाल में जुड़ाव की ताकत को दर्शाएगा। पूजा कमेटी के सहायक सचिव लोकनाथ साहा ने बताया-हमारी इस वर्ष की थीम का नाम ‘जोट’ (जुड़ाव) है, जिसे आर्टिस्ट पुर्णेंदु दे आकार दे रहे हैं। जीवन की शुरुआत से लेकर मानव सभ्यता के विकास तक, हर कदम पर जुड़ाव की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कार्बन, फास्फोरस और नाइट्रोजन जैसे तत्वों के मेल से डीएनए बना, डीएनए से कोशिकाएं बनीं और कोशिकाओं के एक साथ आने से मानव शरीर का निर्माण हुआ। प्रकृति की यह प्रक्रिया बताती है कि अलग-अलग अस्तित्व जब एक सूत्र में बंधते हैं, तभी बड़ी रचना आकार लेती है।
इसी तरह व्यक्ति परिवार से जुड़ा, परिवार समुदाय से और समुदाय समाज से। जो काम अकेला व्यक्ति नहीं कर सकता, उसे सामूहिक प्रयास संभव बना देता है। थीम इसी विचार को रेखांकित करती है कि साथ होने में केवल संख्या की ताकत नहीं, बल्कि सृजन की क्षमता भी छिपी है।
भाषा और कला में भी जुड़ाव की कहानी
साहा ने आगे कहा-ध्वनियां मिलकर शब्द बनाती हैं और शब्द भाषा का रूप लेते हैं। रेखाएं जुड़कर चित्र बनाती हैं, सुर मिलकर राग रचते हैं और अलग-अलग रंग मिलकर दुनिया को रंगीन बनाते हैं यानी सृजन की पहली शर्त ही जुड़ाव है। इतिहास भी सामूहिक शक्ति के ऐसे उदाहरणों से भरा है।
रामायण की वानर सेना हो या महाभारत के बड़े गठबंधन, साथ आई शक्तियों ने इतिहास की दिशा बदली। आज भी दुनिया में विभिन्न देश और समाज साझा हितों के लिए एक-दूसरे से जुड़ते हैं और नए संबंधों का निर्माण करते हैं।
प्रकृति में भी हर तरफ जुड़ाव
साहा ने कहा-मधुमक्खियां मिलकर छत्ता बनाती हैं, पक्षी तिनके जोड़कर घोंसला तैयार करते हैं और बूंदें मिलकर बादल का रूप लेती हैं। पत्तियां जुड़ती हैं तो जंगल बनता है। हमारी थीम में ये सब परिलक्षित होगा। इसके साथ यह भी दिखाया जाएगा कि मनुष्य जब प्रकृति से अपना संबंध कमजोर करता है, तब प्राकृतिक संतुलन भी प्रभावित होता है। ‘जोट’ इस टूटते संबंध की ओर भी ध्यान खींचता है और मनुष्य व प्रकृति के बीच फिर से मजबूत रिश्ता बनाने का संदेश देता है।
‘जोट’ की सबसे बड़ी प्रतीक हैं देवी दुर्गा
जब सृष्टि पर असुर शक्तियों का संकट आया, तब देवताओं ने अपनी अलग-अलग दिव्य शक्तियों को एकजुट किया। उन्हीं सामूहिक शक्तियों से देवी दुर्गा का प्राकट्य हुआ इसलिए दुर्गा स्वयं ‘जोट’ की सबसे बड़ी प्रतीक बनकर सामने आती हैं-अलग-अलग शक्तियों का मिलन, जो अधर्म के विरुद्ध एक ऐसी सामूहिक शक्ति में बदल गया, जिसने सृष्टि की रक्षा की।
