कोलकाता, विशाल श्रेष्ठ। कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के लिए अपनी सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है, खासकर मानसिक स्वास्थ्य का। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह सलाह दी है। फोर्टिस हॉस्पिटल आनंदपुर के कंसल्टेंट (मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंस) डॉ संजय गर्ग ने डॉक्टर्स डे पर कहा-'डॉक्टर भी आखिरकार इंसान हैं और वे भी कोरोना के इस मुश्किल दौर में अत्यधिक ड्यूटी के कारण तनाव के शिकार हो सकते हैं इसलिए उनका अपना ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है। अगर वे मानसिक तनाव व थकान महसूस कर रहे हैं तो इससे उबरने के लिए थेरेपी का सहारा लेना चाहिए।'

डॉ गर्ग ने आगे कहा-'दुर्भाग्यवश आज भी थेरेपी को नकारात्मक तौर पर देखा जाता है और इसे लेकर काफी भ्रांतियां हैं। डॉक्टरों के एक वर्ग को भी लगता है कि अगर वे थेरेपी का सहारा लेंगे तो लोगों को ऐसा लगेगा कि वे इस पेशे के लिए फिट नहीं है जबकि ज्यादातर डॉक्टरों के लिए थेरेपी बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है क्योंकि उन्हें इस समय रोजाना बेहद तनावपूर्ण परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है।'

डॉ जयदीप घोष, कंसल्टेंट (इंटरनल मेडिसिन) ने कहा-'पश्चिमी देशों में तनाव और जिम्मेदारियों से बोझिल होने पर डॉक्टर अक्सर मनोविज्ञानियों की मदद लेते हैं। भारत जैसे देश, जहां जनसंख्या के लिहाज से डॉक्टरों की संख्या बहुत कम है, वहां हर समय काम करना डॉक्टरों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। शुरू में यह बेहद चुनौतीपूर्ण लगता है लेकिन बाद में डॉक्टर इसके अभ्यस्त हो जाते हैंं, हालांकि कुछ मामलों में यह तनाव बढ़ा देता है।

उन मामलों में थेरेपिस्ट की जरूरत पड़ सकती है।' डॉ केएम मंदाना ( डिपार्टमेंट ऑफ कार्डियोथोरेसिस सर्जरी) ने कहा-'कोरोना काल में अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों की महत्ता काफी बढ़ गई है। मरीजों का सही तरीके से इलाज ही डॉक्टरों व चिकित्सा कर्मियों के लिए सबसे बड़ा प्रेरक है।' स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि डॉक्टरों के सामने इस वक्त अपने परिवार और काम में संतुलन बनाकर चलने की भी कठिन चुनौती है। ऐसे में उनका शारीरिक और मानसिक तौर पर पूरी तरह फिट होना बहुत जरुरी है। 

Posted By: Preeti jha

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