बंगाल: अब गुरुदेव टैगोर की ‘स्मृति’ बन दौड़ेगी पहाड़ की रानी ‘ट्वॉय ट्रेन’, 1 अक्टूबर से शुरू होगा संचालन
दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की नाट्य रचना 'मुक्तधारा' के नाम पर एक विशेष टॉय ट्रेन चलाएगा।
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(एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
डीएचआर चलाएगा गुरुदेव टैगोर की 'मुक्तधारा' नाम की स्पेशल टॉय ट्रेन।
कर्सियांग से महानदी के बीच नए रूट पर चलेगी यह ट्रेन।
1 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी, टैगोर के कृतित्व से कराएगी रूबरू।
आलोक राय, सिलीगुड़ी। वर्ष 1913 का वह दौर जब दुनिया के अधिकांश देश उपनिवेशवाद के दंश से ग्रसित होकर स्वयं को औपनिवेशिक देशों, जैसे ग्रेटब्रिटेन, फ्रांस, पुर्तगाल फिर बाद में इसी अंधी दौड़ में शामिल हुए जर्मनी,अमेरिका व सोवित रूस आदि राष्ट्रों द्वारा पहनाई गई स्लेव बेड़ियों से मुक्त करने की पटकथा लिख रहे थे तब एक पहला गैर युरोपीय व भारतीय ‘गीतांजली’ की सुमधुर पंक्तियों की रचना कर दुनिया को मानवीय संवेदनाओं से सींचने की आधारशिला रख रहा था।
जी हां आपने सही समझा यहां बात हो रही है बंगाल के बेटे व गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर की, जिन्हें 1913 में साहित्य का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार दिया गया था....। सुकून की बात यह है कि सात अगस्त 1941 को उनके निधन के लगभग 85 साल बाद उनका व्यक्तित्व व कृतित्व भारत के जेन-जी व अन्य देशी-विदेशी पर्यटकों के जेहन में पुन: जीवंंत हो सकेगा।
और यह पुनीत कार्य गुरुदेव की जन्मभूमि बंगाल की पहचान और दुनिया भर के पर्यटकों के दिलों की धड़कन छुक-छुक कर पहाड़ की वादियों में दौड़ती दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे(डीएचआर) की ट्वाय ट्रेन करेगी।
डीएचआर अपने अस्तित्व वर्ष चार जुलाई 1881 से अब तक के सफर में पहली बार गुरुदेव की एक अन्य कृति (नाट्य रचना) ‘मुक्तधारा’ पर स्पेशल ट्वाय ट्रेन चलाएगी,जिसका नाम मुक्तधारा स्पेशल ट्वाय ट्रेन रखा गया है। इसके लिए महीनों की मशक्कत के बाद नए रूट पर पटरियां बिछा दी गईं हैं। इसपर रेलवे ने खूब पैसा भी खर्च किया है।
कर्सियांग से महानदी के बीच चलेगी मुक्तधारा स्पेशल ज्वाय राईड ट्वाय ट्रेन
अपने अस्तित्व के 145 साल बाद डीएचआर ने पहली बार कर्सियांग से महानदी के बीच लगभग 6 से 7 किलोमीटर के मार्ग पर नई नैरो गेज रेल लाइन के रूप में नये रूट का निर्माण किया है। इस रूट पर सप्ताह के सातों दिन पर्यटकों के लिए ट्वाय ट्रेन चलेगी जिले ज्वाय राईड कहा जाएगा। हालांकि ज्वाय राईड की सुविधा अन्य रूटों पर भी है,लेकिन इसकी खासियत यह है कि इस ज्वाय राईड का नाम रवीन्द्र नाथ टैगोर की नाट्य रचना मुक्तधारा के नाम पर मुक्तधारा स्पेशल रखा गया है।
पर्यटन विभाग बंगाल आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को गुरुदेव की इस रचना के महत्व व उसकी सारगर्भिता के बारे में जागरूक करेगा। खास बात यह है कि यह मुक्तधारा स्पेशल ट्वाय ट्रेन कोयला नहीं डीजल की ताकत से दौडे़गी,जिसकी रफ्तार अन्य रूटों पर चलने वाली ट्वाय ट्रेन से कहीं अधिक होगी। डीएचआर का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डीएचआर की ट्वाय ट्रेन को यूनेस्को ने विश्व विरासत(वर्ल्ड हैरिटेज) का दर्जा दिया हुआ है।
इसलिए रखा गया मुक्तधारा स्पेशल नाम
यह नाट्य रचना वर्ष 1922 में बंगाली भाषा में प्रकाशित हुई थी। बाद में इसका अनुवाद अन्य भाषाओं (जैसे अंग्रेजी में द वाटरफाल) में किया गया। इस नाटक की कहानी 'मुक्तधारा' नाम की एक पहाड़ी जलधारा (नदी) और उस पर बनाए गए एक बड़े बांध के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे मानवता और प्रकृति की आजादी के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है। मुक्ताधारा रचना की यही विशेषता डीएचआर के लिए प्रेरणा स्रोत बनी,जिसके बाद मुक्तधारा स्पेशल ट्रेन चलाने का आइडिया आया।
बजट व प्रस्ताव हो चुका है पास,एक अक्टूबर से दौड़ेगी ट्वाय ट्रेन
डीएचआर के निदेशक ऋषभ चौधरी ने बताया कि इसका प्रस्ताव व बजट डीएचआर के किटहार डिवीजन से पास हो चुका है। हालांकि, इस नए रूट पर प्रतिदिन ट्वाय ट्रेन के संचालन में कितना खर्चा आएगा,इसका विवरण उन्होंने देने से मना कर दिया। ऋषभ चौधरी ने कहा कि हम इस नई योजना को लेकर बेहद उत्साहित हैं। यह पहल देशी-विदेशी पर्यटकों खासकर जेन जी को गुरुदेव के व्यक्तित्व व कृतित्व से रूबरू कराएगी। यह ट्रेन अगले माह एक अक्टूबर 2026 से नियमित सातों दिन चलेगी।
विलुप्त होते ‘रेड पांडा’ के नाम से भी चलेगी डीएचआर की एक और स्पेशल ट्रेन
बता दें कि डीएचआर पहाड़ों पर पाए जाने वाले विलुप्त प्राय जानवार ‘रेडपांडा’के प्रति पर्यटकों को जागरूक करने के लिए भी इस जानवार के नाम से भी स्पेशल ट्रेन चलाएगी। इसकी भी शुरुआत मुक्तधारा स्पेशल की तरह एक अक्टूबर 2026 से ही होगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि इन रूटों पर चलने वाली इन दोनों ही स्पेशल ट्वाय ट्रेनों से भारतीय रेलवे व बंगाल को भारी राजस्व प्राप्त होगा।
