बंगाल: त्योहारी मौसम में दार्जिलिंग की ट्वॉय ट्रेन से रेलवे की चांदी,21 दिनों में करीब 12 हजार पर्यटकों ने किया सफर
दुर्गापूजा की छुट्टियों में दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) की ट्वाय ट्रेन ने 12 हजार यात्रियों को आकर्षित कर 1.41 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया।

दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे ट्वाय ट्रेन। (फोटो-इंटरनेट मीडिया)
HighLights
दुर्गापूजा में दार्जिलिंग ट्वाय ट्रेन ने रिकॉर्ड कमाई की।
21 दिनों में 12 हजार से अधिक पर्यटकों ने सफर किया।
राजस्व में पिछले साल से 25% की वृद्धि दर्ज की गई।
जागरण संवाददाता, कर्सियांग। दुर्गापूजा की छुट्टियों में बंगाल में दार्जिलिंग पहाड़ पर उमड़े पर्यटकों ने दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) की कमाई को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल इस ऐतिहासिक ट्वाय ट्रेन में एक से 21 अक्टूबर तक कुल 12 हजार यात्रियों ने सुहाना सफर किया।
इससे भारतीय रेलवे को 1.41 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। पिछले वर्ष की दुर्गापूजा अवधि की तुलना में इस बार यात्रियों की संख्या और राजस्व, दोनों में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।दुर्गापूजा के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों से बड़ी संख्या में पर्यटक दार्जिलिंग और आसपास की पहाड़ियों में पहुंचते हैं।
धुंध और बादलों से घिरी पहाड़ियां, प्राकृतिक नजारे और भाप व डीजल इंजन से चलने वाली ट्वाय ट्रेन की सीटी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख हिस्सा हैं। ऐतिहासिक रेलमार्ग पर सफर का अनुभव दार्जिलिंग की पर्यटन पहचान को मजबूत करता है।
पर्यटकों की बढ़ती मांग को देखते हुए डीएचआर ने इस पूजा सीजन में कई विशेष पर्यटन सेवाएं और जायराइड शुरू किए। इनमें मुक्तधारा जायराइड और विरासत पर आधारित विशेष यात्राओं को पर्यटकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली। इन सेवाओं के जरिए यात्रियों को पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता के साथ क्षेत्र की समृद्ध रेल विरासत को करीब से जानने का अवसर मिला।
आधुनिक और पारंपरिक इंजनों के साथ नई सेवाओं की तैयारी
डीएचआर के निदेशक ऋषभ चौधरी ने यात्रियों की बढ़ती संख्या और राजस्व पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि रेलवे का उद्देश्य केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना नहीं, बल्कि हिमालय की विरासत और इतिहास को संरक्षित रखते हुए विश्वस्तरीय यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि पर्यटकों के आकर्षण को और बढ़ाने के लिए आधुनिक और पारंपरिक इंजनों के संयोजन से नई सेवाएं शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। दुर्गापूजा के दौरान मिली प्रतिक्रिया से रेलवे अधिकारियों को आगामी सर्दियों के पर्यटन सीजन को लेकर भी उम्मीद है।
इस ट्रेन की लोकप्रियता से दार्जिलिंग के साथ आसपास के पर्यटन स्थलों और स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिलने की संभावना है। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही पहाड़ की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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