कोलकाता, जागरण संवाददाता। एशिया के सबसे बड़े रेडलाइट एरिया सोनागाछी के सेक्स वर्करों के मानसिक स्वास्थ्य का डाटाबेस तैयार किया जाएगा। इस बाबत छह सेक्स वर्करों को पेशेवर मनोचिकित्सकों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है।

सेक्स वर्करों को होने वाले मानसिक तनाव व दुश्चिंता को दूर करने के लिए उनके संगठन दुर्बार महिला समन्वय कमेटी ने एक गैरसरकारी संगठन के साथ मिलकर यह पहल की है। प्रशिक्षित टीम सेक्स वर्करों में मानसिक तनाव व दुश्चिंता के शुरुआती लक्षणों को देखकर प्राथमिक चरण में ही उनकी काउंसिलिंग शुरू कर देगी। प्रशिक्षित सेक्स वर्करों को 'पीआर काउंसिलर' नाम दिया गया है।

पीआर काउंसिलर प्रत्येक सेक्स वर्कर से बातचीत कर उनके मानसिक स्वास्थ्य का डाटाबेस तैयार करेगी। गौरतलब है कि वर्तमान में सोनागाछी में 11,000 सेक्स वर्कर रहकर पेशा करती हैं जबकि 2,000 सेक्स वर्कर बाहर से आती हैं।

सोनागाछी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीच्यूट के प्रमुख स्मरजीत जाना ने बताया कि इस पेशे में महिलाओं को बहुत परेशानी और शोषण झेलना पड़ता है। इसके कारण बहुत से सेक्स वर्कर मानसिक तनाव से ग्रसित हो जाते हैं। उनमें आत्महत्या की प्रवृत्ति जन्म लेती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना शुरू की गई है। हम शुरू में इलाके के 500-600 सेक्स वर्करों तक पहुंचेंगे और बातचीत के आधार पर उनके मानसिक स्वास्थ्य का डाटाबेस तैयार किया जाएगा।

दुर्बार की चीफ मेंटर भारती दे ने बताया कि नोटबंदी के कारण सेक्स वर्करों को काफी आर्थिक समस्या हुई थी, जिसके कारण कुछ तनाव में चली गई थीं। सामाजिक बहिष्कार के भय से भी वे ग्रसित रहती हैं। ग्राहकों के दु‌र्व्यवहार का भी उन्हें सामना करना पड़ता है। 

Posted By: Preeti jha