कोलकाता, विशाल श्रेष्ठ। कोरोना ने भले पूरी दुनिया के लोगों के सिर को भारी कर रखा हो, लेकिन उसकी वजह से रवींद्र सेतु (हावड़ा ब्रिज) इन दिनों भार-मुक्त है। 77 साल के लंबे इतिहास में पहली बार हावड़ा ब्रिज आराम फरमा रहा है। उसपर रोज की तरह लाखों वाहनों और पैदल यात्रियों को ढोने का बोझ नहीं है।

हावड़ा ब्रिज का रखरखाव करने वाली संस्था कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन विनीत कुमार ने बताया-'हावड़ा ब्रिज पर अभी भार उसके 1/10 भाग से भी कम है। प्राइवेट कारों के अलावा जरुरी सेवा वाले वाहन ही ब्रिज से आवागमन कर रहे हैं।' गौरतलब है कि हुगली नदी पर बना हावड़ा ब्रिज दुनिया के व्यस्ततम कैंटीलीवर ब्रिज में से एक है। 705 मीटर लंबे इस ब्रिज से आम दिनों में रोजाना 3,00,000 वाहन और 4,50,000 पैदल यात्री आवाजाही करते हैं। हावड़ा ब्रिज पर भार कम करने के लिए विद्यासागर सेतु (द्वीतीय हावड़ा ब्रिज) का निर्माण कर 1992 में इसे शुरू किया गया था, लेकिन खास फायदा नहीं हुआ। हावड़ा ब्रिज पर भार साल-दर-साल बढ़ता चला गया। इसकी मुख्य वजह ब्रिज के हावड़ा छोर पर हावड़ा स्टेशन और कोलकाता छोर पर बड़ाबाजार का होना है। ब्रिज का भार कम करने के लिए 2007 में इसपर ट्रक और मालवाही वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

यह पूछे जाने पर कि क्या लॉकडाउन खत्म होने के बाद हावड़ा ब्रिज पर अचानक ट्रैफिक कई गुना बढ़ जाने से उसकी सेहत पर असर पड़ सकता है, इसके जवाब में विनीत कुमार ने साफ कहा कि ऐसी कोई आशंका नहीं है।

हावड़ा ब्रिज को किया जाएगा सैनिटाइज

लॉकडाउन खत्म होने से पहले हावड़ा ब्रिज को पूरी तरह सैनिटाइज किया जाएगा। कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन विनीत कुमार ने इसकी जानकारी दी। हावड़ा ब्रिज के दोनों ओर के फुटपाथ से रोजाना लाखों पैदल यात्री आवाजाही करते हैं इसलिए ब्रिज की रेलिंग और खंभों को सैनिटाइज करने का निर्णय लिया गया है।  

Posted By: Preeti jha

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