कोलकाता, राज्य ब्यूरो।  बंगाल में गुरुवार सुबह के समय ट्रेनों में कम भीड़ दिखी, लेकिन नौ बजते ही ऑफिस टाइम में भीड़ जुटनी शुरू हो गई। इस दौरान शारीरिक दूरी की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। सफर के दौरान बड़ी तादाद में यात्री एक-दूसरे से सटकर बैठे दिखाई दिए। लोगों ने कोरोना नियमों का बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखा। कई यात्री बिना मास्क और बिना शारीरिक दूरी के ही ट्रेन में सफर करते दिखे।

बंगाल में करीब 8 महीने से ज्यादा समय बंद रहने के बाद बुधवार सुबह से पटरी पर लोकल ट्रेनें दौड़नी शुरू हो गईं। लोकल ट्रेनें चलाने से पहले रेलवे और राज्य सरकार ने कोरोना वायरस को देखते हुए शारीरिक दूरी के नियमों का पूरा पालन किए जाने का आश्वासन दिया था। हालांकि तमाम दावों के बावजूद इस दौरान शारीरिक दूरी के नियमों की धज्जियां उड़ती दिखीं।

दरअसल, लोकल रेल सेवा को शुरू करने से पहले बंगाल सरकार और रेलवे प्रशासन के बीच कई बार बैठकें भी हुई थीं। बैठक में ट्रेन सेवा शुरू करने के दौरान कोरोना महामारी के लिए जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की बात पर सहमति बनी थी। सियालदह और हावड़ा शाखा के अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकासी के अलग-अलग रास्ते भी बनाए गए हैं। वहीं स्टेशन के बाहर जीआरपी और स्टेशन के अंदर आरपीएफ के जवानों की तैनाती की गई है। वहीं सभी यात्रियों के लिए मास्क पहनना भी अनिर्वाय किया गया है। इन सब के बावजूद नियमों की जमकर धज्जियां उड़ी।

बंगाल में पूर्व और दक्षिण पूर्व रेलवे के तहत चलने वाली लोकल ट्रेन सेवाएं सुबह से शुरू की गईं। पूर्व रेलवे के सियालदह खंड में 413 उपनगरीय ट्रेनें जबकि हावड़ा खंड में 202 ट्रेनें चलनी शुरू हुई है, वहीं दक्षिण-पूर्व रेलवे 81 लोकल ट्रेनों को चला रहा है। मालूम रहे कि कोरोना के चलते 22 मार्च से ही लोकल ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से बंद था। इस दौरान सिर्फ रेलवे कर्मचारियों के लिए स्टाफ स्पेशल ट्रेनें चल रही थीं। 

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