जंगल युद्ध से ड्रोन युद्ध तक, सैनिकों को भविष्य के लिए तैयार कर रहा सीआईजेडब्ल्यू स्कूल
मिजोरम स्थित सीआईजेडब्ल्यू स्कूल भारतीय सेना को भविष्य के युद्धों के लिए तैयार कर रहा है, जिसमें पारंपरिक जंगल युद्ध ...और पढ़ें

सैनिकों को भविष्य के लिए तैयार कर रहा सीआईजेडब्ल्यू स्कूल।
HighLights
मिजोरम का सीआईजेडब्ल्यू स्कूल सैनिकों को भविष्य के युद्धों हेतु तैयार कर रहा।
प्रशिक्षण में ड्रोन, एआई और सूचना युद्ध जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल हैं।
1970 से अब तक 4.36 लाख से अधिक जवानों को प्रशिक्षित किया गया।
जागरण संवाददाता, कोलकाता। युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। घने जंगलों में उग्रवादियों से मुकाबले के दौर से आगे बढ़कर आज युद्धक्षेत्र ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना और आधुनिक तकनीक से प्रभावित है।
इन बदलती चुनौतियों के बीच सेना की पूर्वी कमान अंतर्गत मिजोरम के कोलासिब जिले के वैरेंगते स्थित काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर (सीआईजेडब्ल्यू) स्कूल भारतीय सेना के जवानों को भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार कर रहा है।
पूर्वी कमान के एक अधिकारी ने बताया कि 1970 में स्थापित यह संस्थान कम तीव्रता वाले संघर्ष अभियानों के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां भारतीय सेना के अलावा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और मित्र देशों के सैन्य दलों को भी प्रशिक्षण दिया जाता है। स्थापना के बाद से अब तक करीब 4.36 लाख जवानों और सुरक्षाकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
ड्रोन और सूचना युद्ध पर भी प्रशिक्षण
शुरुआत में स्कूल में जंगल में जीवित रहने, फील्ड क्राफ्ट, दिशा ज्ञान, हथियार संचालन और गुरिल्ला युद्धकौशल पर जोर था। बदलते युद्ध स्वरूप के साथ अब प्रशिक्षण में खुफिया आधारित अभियान, ड्रोन युद्ध, ड्रोन रोधी उपाय, सूचना युद्ध और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों को भी शामिल किया गया है।

आधुनिक संघर्ष में दुष्प्रचार और मनोवैज्ञानिक अभियानों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए सैनिकों को सोशल मीडिया जागरूकता, खुफिया विश्लेषण, अभियानों के कानूनी पहलुओं और स्थानीय आबादी के साथ संवाद का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। ड्रोन प्रशिक्षण के लिए इनडोर और आउटडोर अभ्यास, सिमुलेटर तथा आधुनिक प्रशिक्षण उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
नवाचार और आत्मनिर्भरता पर जोर
सीआइजेडब्ल्यू स्कूल प्रशिक्षण व्यवस्था में नवाचार और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे रहा है। शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और भारतीय उद्योगों, विशेषकर एमएसएमई के साथ मिलकर स्वदेशी प्रशिक्षण समाधान विकसित किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के व्याख्यान और शोध के जरिए प्रशिक्षण को बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप बनाया जा रहा है।
सेना प्रमुख के सतर्कता, नवाचार, संयुक्तता और आत्मनिर्भरता के मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुरूप स्कूल का जोर ऐसे सैनिक तैयार करने पर है, जो बदलते युद्धक्षेत्र में तकनीक और पारंपरिक युद्धकौशल दोनों का प्रभावी इस्तेमाल कर सकें।
